फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सर जान बेमिस थे पहले नगर पालिकाध्यक्ष

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
मिर्जापुर। नगर पालिका परिषद मिर्जापुर का शानदार इतिहास रहा है। सर जॉन बेमिस वार्नेंट वर्ष1867 में पहले अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे। तत्कालीन कलेक्टर एआर पोलक उपाध्यक्ष और सचिव चुने गए थे। साथ ही16 सदस्यों का चुनाव किया गया था। उस समय स्थानीय नागरिक और यूरोपियन नागरिक अलग-अलग मतदान करते थे।
आजादी से पहले नगर पालिका की सदस्यता अवधि छह वर्ष की होती थी। सदस्यों का चुनाव पारियों में होता था, जितनी सीटें खाली होती थीं, उतने पर ही चुनाव कराया जाता था। निर्वाचन के दौरान सचिव का दायित्व होता था कि वह सारे प्रत्याशियों की सूची निर्वाचन के दिन, स्थान और समय के साथ प्रकाशित और वितरित कराए। वर्ष 1873 के चुनाव में नगर में दस सीटें थी। इन 10 सीटों पर चुनाव के लिए 16 व्यक्तियों का आवेदन प्राप्त हुआ था। स्थानीय नागरिकों के लिए चुनाव प्रात: सात बजे से नौ बजे तक और यूरोपियन नागरिकों के लिए प्रात: आठ से दस बजे तक निर्धारित था। पालिका परिषद ने जनता के हितों को देखते हुए कार्यपद्घति को निश्चित किया गया था। उस समय जिन सदस्यों की अवधि समाप्त हो जाती थी, उनका चुनाव दोबारा कराया जाता था। वहीं सीजे पारक, एमए वेली, सी ब्लेयर, डब्लू जे ब्रिटम, मौलवी फरजंद अली जैसे कुछ सदस्य अन्य साधारण सभाओं द्वारा चुने जाते थे। इसके बाद उपाध्यक्ष डीएल हैलकेट ने भी कुछ समय के लिए कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाला था। वर्ष 1869 में एमआई विग्राम मात्र कुछ महीनों के लिए अध्यक्ष चुने गए। इनके स्थानांतरण के बाद डब्लू ड्यूथोइट को कार्यकारी अध्यक्ष चुना गया। इसके बाद 1869 से 1870 तक क़ुछ सदस्यों ने त्यागपत्र दे दिया, इस दौरान ईजी जानकिंसन को उपाध्यक्ष चुना गया।
विज्ञापन


पहली पालिका के सदस्य
मिर्जापुर। नगर पालिका परिषद मिर्जापुर के पहले चुनाव के बाद 16 सदस्य चुने गए थे। जिसमें डीएल हैलकेट, मेजर जीजी एकफोर्ड पुलिस अधीक्षक, राय बालमुकुंद डिप्टी कलेक्टर, मौलवी मेहंदी हसन तहसीलदार, महंत जयराम गिरि, अकबर अली खां, राम रतन, विशेशर दास, चौधरी बेनी माधव चौबे, पाली राम, शीतला प्रसाद चौधरी, महमूद अली वकील, काशीनाथ दूबे, सोहनलाल और गोवर्धन दास छीकमल थे।
विज्ञापन


पालिका के गठन के समय 85 हजार थी आबादी
मिर्जापुर। नगर पालिका बनाने से वर्ष 1900 तक नगर की जनसंख्या लगभग 85 हजार थी। इसके बाद से जनसंख्या में कमी होने लगी और वर्ष 1941 तक लगातार कमी आती गई। वर्ष 1890 में जनसंख्या जहां लगभग 85 हजार थी वहीं 1912 में लगभग घटते घटते लगभग 55 हजार तक पहुंच गई थी। शहर में जनसंख्या कम होने का मुख्य कारण व्यापारिक केंद्र टूटना माना जाता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें