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गंगा की रफ्तार हुई धीमी, जनता ने ली राहत की सांस

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मिर्जापुर। गंगा का जलस्तर स्थिर होने के साथ ही अब कटान का खतरा मड़राने लगा है। पिछले कई दिनों तक गंगा के जलस्तर में दो से तीन सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई थी लेकिन सोमवार को जलस्तर स्थिर रहा। जलस्तर घटने के बाद कटान की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में गंगा के किनारे बसे चील्ह, जिगना और छानबे ब्लाक के गांवों के लोग अब कटान की आशंका को लेकर चिंतित हैं। सोमवार की सुबह गंगा का जलस्तर 70.180 मीटर दर्ज किया गया जबकि खतरे का निशान 77.724 मीटर है।
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चील्ह संवाददाता अनुसार कोन ब्लाक के गंगा के तट पर सेमरा, हरिंसगपुर खुलूआं, तिलठी, मल्लेपुर, मझिगवां, लखनपुर, मवैया, पुराने बाड़ा, मलाधरपुर, चील्ह, भटेवरा, डिंगूरपट्टी, दलापट्टी, रामपुर, चेकसारी, दहिया, मुजेहरा आदि गांव स्थित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गंगा का जलस्तर घटने से कटान का खतरा बढ़ गया है। क्षेत्र में अभी बाढ़ चौकी की स्थापना नहीं हुई है। जिगना संवाददाता केे अनुसार क्षेत्र के हरगढ़, गोगांव, मिश्रपुर, डंगहर, आदमपुर, नीबी गहरवार, चड़ैचा, नौगांव व बबुरा आदि गांवों में बाढ़ का असर तो नहीं है लेकिन कटान का खतरा बढ़ गई है। हालांकि बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन ने श्रीनिवासधाम सहित जोपा, कठवईयां व अकोढ़ी, में बाढ़ की चौकी की स्थापना की है। छानबे ब्लाक में गंगा किनारे के करीब चार दर्जन से अधिक गांव हैं। मझवां संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के बजहां, बरैनी, केवटाबीर, गड़ैली, खमरिया, केगरांव, तिवरानी व मटियारी आदि गांव गंगा किनारे स्थित हैं। हालांकि अभी गंगा का पानी गांवों से आधा किलोमीटर की दूर है। ग्रामीणों का कहना है कि गंगा का जलस्तर घटने से कटान की आशंका को लेकर लोग चिंतित हैं। सीखड़ संवाददाता के अनुसार गंगा का पानी अभी गांवों से काफी दूर है जिसके चलते तटवर्ती गांवों के लोग बाढ़ को लेकर अभी कोई तैयारी नहीं कर रहे हैं। ब्लाक में गंगा किनारे के करीब एक दर्जन गांव स्थित हैं, लेकिन अभी तक कोई बाढ़ चौकी की स्थापना नहीं की गई है।
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