चुनार। पांडेय बेचन शर्मा उग्र पुस्तकालय में बुधवार की रात चुनार साहित्य परिषद की ओर से कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि मेजर कृपाशंकर सिंह ने मां सरस्वती और उग्र जी के चित्र पर माल्यार्पण कर किया।
वाणी वंदना के साथ काव्य गोष्ठी शुरू हुई। कवि अफसर अली ने केवल खेल में दौड़ने से मेडल नहीं मिलता... सुनाया। कवि कमलेश्वर कमल ने चुनार में नव निर्मित पक्का पुल पर अपनी कविता हमें पक्का पुल चुनार क देखा द पिया, सेल्फी बना द पिया ना... सुनाकर श्रोताओं की वाहवाही लूटी। कैलाश पति त्रिपाठी ने हमें भर्तृहरि नाथ नगरिया घुमाय द पिया.., जयप्रकाश जय ने जिस मिट्टी में पला बढ़ा मैं उसका गीत सुनाता हूं.. सुनाया। अनवर अली अनवर ने ताका झांकी करूं मैं अटरिया से.. सुनकर वाहवाही लूटी। इसके अलावा राजकुमार राजन ने गंगा मैया क अद्भुत लहरिया, चला चली देखे सांवरिया सुनाकर गंगा की महिमा का बखान किया। नयन वर्मा ने खेत पर किसान खटे सीमा पर जवान डटे.., रामआसरे राव ने गीत मेरे होठों का ले गया कोई, दर्द मेरे दिल को फिर दे कोई.. सुनाकर श्रोताओं को मुग्ध कर दिया। काव्य गोष्ठी में भरत जौहरी, मस्तराम पांडेय, मंगला सिंह, अभय सिंह, लालसा सिंह, हरिशंकर चौबे, भोला वर्मा आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता कुशवाहा समाज के अध्यक्ष नंदकिशोर कुशवाहा और संचालन अशोक सिंह कुशवाहा ने किया।