मड़िहान। नक्सल क्षेत्र में अधिकारियों की अनदेखी के चलते गरीब महिलाओं को बेहतर चिकित्सकीय सेवा नहीं मिल पा रही है। अस्पताल में एक भी महिला चिकित्सक न होने से अक्सर महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। विवश होकर महिला मरीजों को इलाज के लिए अन्यत्र जाना पड़ता है। रोग विशेषज्ञ के अभाव में लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। मजबूरी में इलाज के लिए लोगों को प्राइवेट अस्पताल जाना पड़ता है।
चार दशक पूर्व तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री पंडित लोकपति त्रिपाठी ने मड़िहान में क्षेत्रीय जनता के बेहतर इलाज के लिए 30 बेड का अस्पताल शुरु कराया, ताकि यहां के लोगों को इलाज के लिए अन्यत्र न जाना पड़े। इससे यहां अच्छे स्वास्थ्य के लिए बेहतर सेवा की उम्मीद भी जगी लेकिन अधिकारियों के उपेक्षात्मक रवैये से मड़िहान सीएचसी में वर्षों से महिला डॉक्टर की तैनाती नही हुई। स्टाफ नर्स के सहारे प्रसव होता है। गंभीर स्थिति में महिला मरीजों को प्राइवेट नर्सिंग होम अथवा जिला अस्पताल मिर्जापुर ले जाना पड़ता है। ऐसी परिस्थिति में कभी कभी मरीजों को जान तक गंवानी पड़ जाती है। अस्पताल में पैरामेडिकल स्टाफ तय सीमा से अधिक है। अकेले वार्ड ब्वाय को ही ले लीजिए तो तीन वार्ड ब्वाय की जगह चार वार्डब्वाय अस्पताल में तैनात हैं। सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ, सर्जन, मेडिसिन समेत अन्य चिकित्सक भी नही हैं। चौकीदार का काम कुक को करना पड़ता है। सफाई कर्मी न होने से अस्पताल में गंदगी का अंबार लगा है। वेस्टेज ठेकेदार कभी क्षेत्रीय अस्पतालों में दिखाई ही नही पड़ते। न्यू पीएचसी गोपलपुर में कर्मचारियों की लापरवाही से वाहन में महिला को प्रसव हो गया था।