विंध्याचल। विंध्याचल के महुवारी कला के सप्तसागर मेले में शुक्रवार को आस्थावानों का रेला उमड़ पड़ा। सुबह से ही मंदिर पहुंचे नर-नारियों व बच्चों ने गणपति भगवान के दिव्य स्वरूप का दर्शन-पूजन कर निहाल हो उठे। घंटा व घड़ियाल, शंख व गणपति बप्पा मोरया के जयकारे से पूरा वातवारण भक्तिमय हो रहा था। दर्शन-पूजन के उपरांत भक्तों ने मंदिर परिसर में लगे मेले में भ्रमण कर अपने- अपने जरूरत की वस्तुओं की खूब खरीदारी की। मेला क्षेत्र पूरे दिन गुलजार नजर आया।
सप्तसागर मेले में पहुंचे भक्तजन गणपति बप्पा के दर्शन-पूजन करने के बाद शारदीय नवरात्र मेले की तैयारियों में जुट गए। विंध्य कंदराओं से करीब आठ किलोमीटर दूर बघरा तिवारी गांव में स्थित भगवान श्री गणेश जी के मंदिर पर मेला कुवार मास की चतुर्थी तिथि पर लगा। शुक्रवार की भोर से देर रात तक गणेश भगवान के भव्य स्वरूप का दर्शनपूजन करने के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। गणेश भगवान का भव्य श्रृंगार तरह-तरह के फूल-पत्तियों से किया गया था, जो एक अलौकिक छटा बिखेर रही थी। इस मौके पर गणेश मंदिर दुल्हन की तरह सजाया गया था। भगवान गणेश जी का दर्शन पूजन करने के लिए विंध्याचल निवासी व आसपास के कई गांवों से उमड़े महिला-पुरुष व बच्चों ने भगवान गणेश की पूजन-अर्चन करके पुण्य के भागी बने। मेला क्षेत्र में सजी तरह-तरह की दूकानों पर खाने-पीने की समानों एवं बच्चों ने खिलौने की खरीददारी की। सप्त सागर की मान्यता है कि सप्तऋषि आकर तपस्या की थी और सात तालाब का निर्माण कर, उसी में स्नान कर भगवान गणेश जी का पूजन-अर्चन करते थे। यह स्थान मां विंध्यवासिनी मां के मणिद्वीप का रास्ता भी जाने का है। चतुर्थी तिथि पर भक्त दर्शन-पूजन करके अपने-अपने कार्यों में लग जाते थे। कहा जाता है कि प्रथम दर्शन गणेश भगवान कर नवरात्र मेला शुरू होने से पहले अपने-अपने कार्यों में लग जाते हैं। मंदिर के महंत तेज बहादुर गिरी एवं मौसम गिरी ने बताया कि आज के दिन पूरे भारतवर्ष में जो गणेश उत्सव का परंपरा चला है, आज उसका समापन भी होता है। आज के दिन गणेश भगवान का दर्शन कर पुण्य के भागी बनते हैं और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।