मिर्जापुर । जिले में गोपाष्टमी के अवसर पर गायों की पूजा अर्चना कर उन्हें तरह तरह के खाद्य पदार्थ खिलाये गए। गायों के प्रति आस्था प्रकट करते हुए नागरिकों ने गोसेवा एवं गोपूजा की। इस कार्य में महिलाओं और युवाओं के साथ समाज के अग्रणी लोग भी लगे रहे। सभी ने अपने हाथों से गायों की खातिरदारी की। कई स्थानों पर तो उन्हें वस्त्र भी अर्पित किए गए।
नगर के बूढ़ेनाथ मंदिर पर सामाजिक कार्यकर्ता जलज नेत के आवास पर गोसेवा के महात्म्य विषय पर गोष्ठी हुई । इसके बाद आसपास के घरों के अलावा मंदिर परिक्षेत्र में घूमने वाली गायों को एकत्र कर उनका जलाभिषेक, चंदन, पुष्प, धूप-दीप आदि पंचोपचार विधि से पूजन बूढ़ेनाथ मंदिर के महंत डा. योगानंद गिरि एवं महंत नामदेव, गोसेवक राज माहेश्वरी एवं जलज नेत ने पूजन अर्चन किया । इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि कार्तिक पूर्णिमा को भगवान कृष्ण ने सात दिन तक गोवर्धन पर्वत अपनी कनिष्ठिका उंगली पर धारण किया था । सात दिनों के बाद अष्टमी को श्रीकृष्ण ने गोपालन को बढ़ावा देने के लिए गाय की पूजा की । तभी से कार्तिक पूर्णिमा को गोपाष्टमी का पर्व मनाया जाता है । कहा गया कि गो संवर्धन से आर्थिक समृद्धि के अलावा पर्यावरण का संतुलन होता है । कार्यक्रम आयोजक जलज नेत एवं गोभक्त राजमहेश्वरी ने यह तय किया कि हर माह के शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि को गोपूजा की जाएगी । अन्य वक्ताओं एवं गोपूजकों में गोपाल तिवारी, विक्की मेहरोत्रा, लक्की यादव, दीपक यादव, घनश्याम गुप्ता, पीयूष पांडेय, राजकुमार लड्ढा, रवि टण्डन, मनोज यादव, सन्तोष यादव, सत्यनारायण केसरवानी, पंकज यादव आदि शामिल थे । कार्यक्रम का संचालन सलिल पांडेय ने किया ।इसके पूर्व गोष्टमी के दिन गाय की परिक्रमा एवं गाय के साथ पदयात्रा की पौराणिक महत्ता के चलते प्रात: गायों का जुलूस निकाला गया जो त्रिमोहानी, नबालक तबेला, मुकेरी बाजार, लालडिग्गी तक गया।
गौशाला भवन का हुआ शुभारंभ
विंध्याचल। मां विंध्यवासिनी मंदिर से सात किलोमीटर दूर विंध्य पर्वत के बीचोबीच भागदेवर गांव मे स्थित महर्षि श्री देवराहा हंसबाबा आश्रम में एक विशाल गौशाला भवन का शुभारंभ हुआ। ब्रह्मवेत्ता देवराहा हंस बाबा के द्वारा गौ सेवा संवर्धन एवं संरक्षण के अनुरूप भवन का नाम महर्षि देवराहा बाबा गौ सेवा संरक्षण एवं संवर्धन धाम रखा गया।
गोपाष्टमी के अवसर पर लक्ष्मी माता श्री का हवन कुंड में आहुति दिया गया तथा गांव के नाम से 108 बार पूर्णाहुति की गई। उत्सव में देश-विदेश के भक्तगण पधार कर दर्शन पूजन कर हवन कुंड में आरती देते हैं। वर्तमान समय में आश्रम में छह हजार से ज्यादा गायों की सेवा की जाती है। साथ ही साथ गोकशी के पश्चात जो पकड़ी जाती है उसे पुणे यहां आश्रम में रख कर उनकी सेवा की जाती है। अष्टमी उत्सव पर दिल्ली, दक्षिण भारत, गुजरात, महाराष्ट्र, कोलकाता, उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, उड़ीसा आदि राज्यों से आए भक्त शामिल हुए। वृंदावन से पहुंचे आचार्य मनीष के द्वारा पूजा पाठ संपन्न किया गया। इस मौके पर एसके सक्सेना, राकेश बंसल, रवि गुप्ता, डा. डीएस सक्सेना, सतीश कावड़, जेपी तिवारी, नारायण बाबा आदि साधु सन्यासी एवं भक्त मौजूद रहे। गौ पूजन के बाद प्रसाद वितरण एवं भंडारा आयोजित किया गया था।