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संवेदना का पाठ पढ़ाती है ईदगाह की कहानी

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मिर्जापुर। नगर क्षेत्र के तिवराने टोला स्थित गुड मार्निंग स्कूल में सोमवार को कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती मनाई गई। समारोह का शुभारंभ मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण व पुष्प अर्पित कर किया गया, वहीं विद्यालय के बच्चों को कथा सम्राट के बारे में जानकारी दी गई। वरिष्ठ साहित्यकार सलिल पांडेय ने मुंशी जी के साहित्यिक योगदान पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि वह गरीबी के बावजूद नैतिक दृष्टि से बेहद संपन्न थे, उनकी कहानी ईदगाह समाज में संवेदना की पाठ पढ़ाती है।
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जयंती समारोह के दौरान बच्चों ने मुंशी प्रेमचंद की ईदगाह कहानी के अत्यंत संवेदनशील पक्ष का भावपूर्ण मंचन किया, जिसमें एक छोटे बच्चे द्वारा अपनी आकांक्षाओं को त्याग कर परिवार की बूढ़ी काकी के प्रति अपनाए गए उत्तरदायित्व का निर्वहन किया गया था। सलिल पांडेय ने कहा कि मुंशी जी अपनी कहानियों में अंग्रेजों के शोषण के खिलाफ सामंतशाहों को आधार लेकर कलम चलाते थे। उन्होंने कहा कि ईदगाह कहानी में ईद पर जहां गांव के बच्चे मेला देेखने में मनोरंजन कर रहे हैं और खेल के सामान तथा खाने पीने में पैसा खर्च कर रहे हैं, वहीं कहानी का मुख्य पात्र छोटी उम्र का हामिद बूढ़ी काकी के लिए चिमटा खरीद कर उच्च उत्तरदायित्व का निर्वाह करता है। कहा कि चुनार किले में अंग्रेजों के जमाने में चलने वाले बंदीगृह में बंद लोगों के बच्चों को पढ़ाया भी करते थे। चुनार में उन्होंने देखा कि किस प्रकार ब्रिटिश हुक्मरान आसपास के गांवों के लोगों खासकर महिलाओं का शोषण करते थे। उनके मन में इसका गहरा असर पड़ा और उनकी कहानियों में अन्याय व शोषण के खिलाफ विचार ज्यादा होते थे। ईदगाह के मंचन में बूढ़ी काकी की भूमिका करीना त्रिपाठी व हामिद का किरदार आदित्य ने निभाया। प्रधानाचार्य सावित्री पांडेय ने प्रेमचंद के जीवन के बारे में जानकारी दी। इस दौरान रूपा श्रीवास्तव, पूजा मौजूद रहे।
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