मिर्जापुर। अदालत के आदेश पर शुक्रवार को सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ नगर के नेतृत्व में पुलिस टीम ने भटवां की पोखरी में विवादित जमीन पर मकान बनवा कर रहने वाले 80 लोगों के घरों की बिजली और पानी के कनेक्शन काट दिए। नौ लोगों के पास हाईकोर्ट का स्टे होने के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। सिटी मजिस्ट्रेट ने लोगों को बताया कि संबंधित भूखंड के मुकदमे में केबीपीजी कालेज के पक्ष में हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है। ऐसे में इस भूखंड पर रहने वाले लोग जमीन जल्द खाली कर दें।
केबीपीजी कालेज प्रशासन ने 1968 में मिर्जापुर न्यायालय में भटवा पोखरी मोहल्ला निवासी शिवनारायण पांडेय के खिलाफ याचिका दाखिल कर दावा किया था कि जिस जमीन पर वह काबिज होने का दावा कर रहे हैं वह भटवा की पोखरी की छह बीघा जमीन कालेज की है। मामला कोर्ट में चलने पर न्यायालय ने दस मई 1977 को केबीपीजी कालेज के हक में फैसला दिया। 1981 में उच्च न्यायालय में इजरा दाखिल करने पर कोर्ट ने शिव नारायण पांडेय की रीट को खारिज करते हुए मिर्जापुर न्यायालय से डिग्री धारक को कब्जा दिलाने को कहा। मामला अपर जनपद न्यायाधीश के यहां दोबारा पहुंचने पर कोर्ट ने जिला प्रशासन से कब्जेदारों को बेदखल कर डिग्री धारक को जमीन पर कब्जा दिलाने का आदेश दिया। न्यायालय के आदेश पर जिला प्रशासन जब कालेज को जमीन कब्जा दिलाने पहुंचा तो पाया कि वहां 89 लोगों ने घर बना लिया है। यह देख प्रशासन भी हैरान हो गया। मामले से न्यायालय को अवगत कराते हुए जमीन खाली कराने के लिए फोर्स की मांग की गई। प्रशासन ने कई बार डिग्री धारक को कब्जा दिलाने का प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली। एक बार फिर न्यायालय के सख्त होने पर शुक्रवार को सिटी मजिस्ट्रेट पकंज वर्मा, सीओ नगर संजय सिंह, अधिशासी अभियंता बिजली विभाग मनोज यादव व नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी, जलकल अभियंता के साथ भटवा की पोखरी मोहल्ले में पहुंचे। टीम ने मोहल्ले में रहने वाले 80 लोगों के बिजली और पानी के कनेक्शन को काट दिया। वहीं नौ लोगों की ओर से हाईकोर्ट का स्टे दिखाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। भटवां की पोखरी मोहल्ला में रहने वाले लोगों ने बेदखली की कार्रवाई का विरोध किया। कहा कि मामला कालेज और शिवनारायण पांडेय के बीच चल रहा है तो फिर इतने लोगों को क्यों घसीटा जा रहा है। जब कुछ लोगोें ने स्टे ले लिया है तो पूरे मामले पर स्टे होना माना जाना चाहिए।
मोहल्ले के हलीम, सलीम, शंकर मिश्रा, उमाकांत मिश्रा, अनिल अग्रवाल, भोलानाथ, शकुतंला देवी, लकी प्रसाद, भोलानाथ आदि लोगों ने स्टे लिया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को अगर लोगों के बिजली पानी का कनेक्शन काटना था तो पहले नोटिस देना चाहिए था। फिर बेदखली की कार्रवाई करनी चाहिए थी।
वर्जन
कोर्ट के आदेश पर भटवा की पोखरी में विवादित जमीन पर रह रहे लोगों की बेदखली की कार्रवाई के लिए प्रशासन व पुलिस की संयुक्त टीम गई थी। पहली बार में प्रशासन ने वहां रहने वाले 89 में से 80 लोगों के घरों के बिजली और पानी के कनेक्शन कटवा दिए हैं। वहीं नौ लोगों की ओर से हाई कोर्ट का स्टे आर्डर दिखाने पर उनका कनेक्शन नहीं काटा गया है।-पंकज वर्मा, नगर मजिस्ट्रेट