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यर्थाथ गीता के श्रवण से ही सबका कल्याण:स्वामी अड़गडानंदजी

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कछवां। परमात्मा के भजन से ही कल्याण संभव है। इसके अलावा कल्याण का कोई दूसरा रास्ता नहीं है। ये बातें रविवार को स्वामी अड़गड़ानंद महाराज ने बरैनी गांव में प्रवचन के दौरान कही। प्रवचन के बाद भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी तादात में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।
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स्वामी अड़गड़ानंद महाराज ने लोगों को धर्म की परिभाषा बताते हुए कहा कि हमें उस ईश्वर की बात करनी चाहिए, यही धर्म है। धर्म हमें उस तक पहुंचने के विभिन्न रास्ते दिखाता है, यह हमारी मर्जी है। हमें जो रास्ता अच्छा लगे हम उसे चुन लें लेकिन धर्म हमें उन रास्तों को लेकर लड़ना नहीं सिखाता। हम तो चाहे एक ही नाम के उपासक हों, चाहे सबने एक सी वेशभूषा पहन रखी हो, फिर भी हमारे विचारों में इतनी भिन्नता होती है। हममें छोटी छोटी बातों पर मतभेद हो जाता है। कहा कि भजन खुद करने की चीज है। उसे किराया पर नहीं कराया जा सकता है। यदि ऐसा होता तो तमाम लोग भव सागर से पार लग जाते, इसलिए प्रभु नाम का स्मरण आवश्यक है। कहा कि यदि श्रद्धा नहीं होगी तो भजन नहीं हो सकता। साधना एक पद्धति है। यह आत्मा और परमात्मा से मिलन कराती है। भगवान के भजन से दुर्भाग्य भी भाग्य में बदल जाता है। स्वामी जी ने अर्थात गीता के विषय में बताया कि गीता वह सब कुछ है, जिसे याद नहीं किया जा सकता है। जिसे केवल महसूस किया जा सकता है और भक्ति के माध्यम से अनुभव किया जा सकता है। यह हमें जीवन का सही रास्ता दिखाती है, जो हमें ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाती है। गीता ही हमारा धर्मशास्त्र है। इसलिए हर घर में गीता का पाठ होना चाहिए। प्रवचन के पहले गायक डी राय के भजन से सभी भक्त भावविभोर हो गए । इस दौरान नारद महाराज, तानसेन महाराज, आयोजक दिनेश सिंह, राजकुमार उपाध्याय उर्फ पप्पू पंडित, बबलू उपाध्याय आदि उपस्थित रहे।
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