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हिंदी ने लिया ग्लोबल भाषा का रूप

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लालगंज ।श्रीमती इंदिरा गांधी पीजी कालेज में गुरुवार को संस्कृति निर्माण और हिंदी विषयक गोष्ठी का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि समाज का विकास संस्कृति के बिना संभव नहीं है । कहा कि भक्ति काल से संस्कृति निर्माण का गुरुतर दायित्व हिंदी ने संभालना शुरू कर दिया, जिसके कारण हिंदी की व्यापकता बढ़ती गई और धीरे धीरे ग्लोबल व वैज्ञानिक भाषा का रूप धारण कर लिया। हिंदी संघर्ष की भाषा बनी हुई । वह अपनी राह स्वयं चल रही है।
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गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डा. रामलोचन ने कहा कि 1949 हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित किया गया । उन्होंने अप संस्कृति से सावधान रहने की आवश्यकता पर बल दिया । संस्कृत विभाग के डा. हेरंब पांडे ने कहा कि भक्ति काल से ही हिंदी संस्कृति निर्माण का दायित्व पूरा कर रही है और तुलसीदास ने हिंदी को वैज्ञानिक स्वरूप दिया। समाजशास्त्र विभाग के अखिलेश सिंह ने कहा कि भाषा संस्कृति जोड़ने का काम किया। कहा कि किसी से जुड़ते हैं तो समझिए यही संस्कृति है। डा विंध्याचल यादव ने कहा कि धर्म सुंदर होता है लेकिन रूढ़ियां समाज में रुकावट बनती हैं। विषय प्रवर्तन करते हुए डा हरिओम ने कहा कि हिंदी में सभी संस्कृतियों को मिला कर चलने की क्षमता है। संचालन डा गौरव त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर डा उपकेंद्र सिंह, डा नूरजहां, फातिमा, राजेंद्र सिंह यादव, सुशील दूबे, शमला पटेल आदि ने विचार रखे।
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