जिला पंचायत का गठन होने के बाद शनिवार को पहली बार हुई टेंडर प्रक्रिया में जमकर हंगामा हुआ। कई जिला पंचायत सदस्यों ने अध्यक्ष पर चहेतों को ही नियम विरुद्घ टेंडर देने का आरोप लगाया। कमिश्नर से शिकायत की गई कि प्रस्ताव बदलकर बोर्ड बैठक में चर्चा कराए बिना ही टेंडरों को अंतिम रूप दिया गया है।
सीसी रोड, नाली, इंटरलॉकिंग आदि के निर्माण कार्यों को लेकर जिला पंचायत कार्यालय में लगभग सवा नौ करोड़ रुपये के टेंडर शनिवार को खोले गए। कुछ जिला पंचायत सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि टेंडरों में धांधली की जा रही है। प्रदीप हुड्डा, ठाकुर विनोद, मुकेश चरला, दिलशाद आदि ने कहा कि चहेते ठेकेदारों के न हैसियत प्रमाणपत्र जमा कराए गए और न ही चरित्र प्रमाणपत्र।
अन्य लोगों के टेंडरों को निरस्त कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सदन का गठन होने के 90 दिन बाद भी बैठक नहीं हुई। बोर्ड बैठक में भी टेंडरों को मंजूरी नहीं दी गई है। उन्होंने अपर मुख्य अधिकारी नूतन शर्मा के सामने अपनी शिकायत दर्ज कराई। बाद में सभी टेंडर खोल दिए गए। उधर, नाराज सदस्यों ने कमिश्नर आलोक सिन्हा से भी मामले की शिकायत की है।
नियमानुसार ही टेंडर कराए गए हैं। जो लोग विरोध कर रहे हैं, वह विपक्षी हैं। मै उनसे कहना चाहूंगी कि वह तर्क संगत तरीके से टेंडर डालकर काम कराएं, ताकि जिले का विकास हो सके।
- सीमा प्रधान, जिला पंचायत अध्यक्ष।
टेंडर करा दिए गए हैं। सदस्यों ने जो विरोध जताया है, उस पर भी क्रास चेकिंग कर ली जाएगी। जो टेंडर हुए हैं, वह नियमानुसार हुए हैं।
नूतन शर्मा, अपर मुख्य अधिकारी।