मेरठ। दूषित भोजन-पानी, दूषित रेजर या टूथब्रश का इस्तेमाल और असुरक्षित यौन संबंधों की वजह से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के युवा हेपेटाइटिस ए, बी और सी की चपेट में आ रहे हैं। इस बीमारी में लिवर में सूजन आ जाती है। इनमें हेपेटाइटिस सी के मरीज सबसे ज्यादा हैं, जिसे काला पीलिया भी कहते हैं। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज हेपेटाइटिस के इलाज का नोडल सेंटर है। यहां 10019 मरीजों का इलाज चल रहा है। इनमें करीब 90 प्रतिशत मरीज हेपेटाइटिस सी के हैं। यहां से करीब 16 हजार मरीज इलाज करा चुके हैं।
लोगों को इस बीमारी के बारे में जागरूक करने के लिए हर साल 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है। नोडल अधिकारी डॉ. अरविंद ने बताया कि मेडिकल में मेरठ के अलावा गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर, बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर, बिजनौर, रामपुर, मुरादाबाद और अमरोहा आदि जिलों के मरीजों का इलाज चल रहा है। इनमें 25 से 50 साल उम्र वालों की संख्या सबसे अधिक है। मेडिकल में मरीज़ को 18 नंबर में लिवर ओपीडी में दिखाना होता है। यहां से उसका सैंपल जांच के लिए माइक्रोबायोलॉजी लैब भेजा जाता है। जांच में हेपेटाइटिस सी की पुष्टि होने पर निशुल्क इलाज शुरू किया जाता है। तीन माह दवाइयां खानी पड़ती हैं, फिर जांच होती है, सही होने पर दवाइयां बंद कर दी जाती हैं, नहीं तो दवाइयां अगले तीन माह के लिए जारी रखी जाती हैं। ठीक होने तक यही प्रक्रिया अपनाई जाती है।
माइक्रोबायोलॉजी लैब के पऱभारी डॉ. अमित गर्ग ने बताया कि हेपेटाइटिस ए दूषित भोजन या पानी से फैलता है और अमूमन जल्दी ठीक हो जाता है। हेपेटाइटिस बी और सी अधिक गंभीर है। यह रक्त और शारीरिक तरल पदार्थों के माध्यम से फैलते हैं। इससे लिवर को गंभीर नुकसान हो सकता है, कैंसर भी हो सकता है। हेपेटाइटिस सी एक संक्रामक रोग है, जो हेपेटाइटिस सी वायरस एचसीवी की वजह से होता है।
इन कारणों से होती है बीमारी
- दूषित सिरिंज का उपयोग करना।
- दूषित रेजर या टूथब्रश का इस्तेमाल।
- दूषित रक्तदान, अंगदान या लंबे समय तक डायलिसिस द्वारा।
- दूषित सुईं से टैटू बनवाना या एक्यूपंचर करवाना।
- असुरक्षित यौन संबंध।
ऐसे करें रोकथाम
- साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
- टैटू बनवाते हुए ध्यान रखें कि सुईं संक्रमित न हो।
- अपने टूथब्रश और रेजर किसी के साथ साझा न करें।
- शराब का सेवन न करें या अत्यंत कम मात्रा में करें।
- विशेषकर टॉयलेट से आने के बाद सफाई का ध्यान रखें।
लक्षण
- डायरिया
- थकान
- भूख न लगना
- उल्टी होना
- मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना
- यूरिन का रंग गहरा होना
- मल का रंग पीला हो जाना
- त्वचा, आंखों के सफेद भाग, जीभ का रंग पीला पड़ जाना (ये लक्षण पीलिया में दिखाई देते हैं)
- लिवर का आकार बढ़ जाना