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बसंत उत्सव पर युवाओं का धमाल, शहर में दिनभर रहा वो काटा

Thu, 02 Feb 2017 11:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
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वो काटा
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ऋतुराज बसंत के स्वागत में शहर में बासंती बयार बही। पीत वस्त्र और पीले फूलों से विद्या की देवी मां शारदे का हवन-पूजन हुआ। शिक्षण संस्थानों, कला संस्थानों में वीणा वादिनी को छात्रों ने नमन किया। खेतों में खिले पीले सरसों के फूलों और फसलों के नवांकुराें के बीच युवाओं ने सेल्फी ली। मंदिरों, खेतों, छतों में चहुंओर बसंती रंग हर आयु वर्ग में मुस्कुराता नजर आया। शहर के गली-मोहल्लों में सुबह 5 बजे से ही डीजे की गूंज उठी। डीजे की धुन पर युवाओं ने पतंगें उड़ाई, पेंच लड़ाए और डांस किया। आसमान में लाल, पीली, हरी, नीली, धानी पतंगों ने इंद्रधनुष सजाकर पतंगबाजों को खूब छकाया। सभी ने बसंत का पर्व हर्षोल्लास संग मनाया।
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बुधवार सुबह दिन निकलते ही लोग मकानों की छतों पर पहुंच गए। डीजे की धुन के बीच जमकर पतंगें उड़ाई। बच्चों से लेकर महिलाओं ने खूब पतंगबाजी का आनंद लिया। ब्रह्मपुरी, दिल्ली रोड, घंटाघर, लाला का बाजार, बुढ़ाना गेट, बच्चा पार्क, फूलबाग कॉलोनी, गंगानगर, शास्त्रीनगर, जागृति विहार, कंकरखेड़ा, रोहटा रोड, माधवपुरम में पतंग उड़ाई गई। पूरा आसमान पतंगों से रंग बिरंगा हो गया। देर शाम तक पतंगबाजी हुई।

वहीं मेरठ पब्लिक स्कूल की जूनियर विंग में मां सरस्वती की पूजा अर्चना की गई। छात्रों ने रंग-बिरंगी पतंगें उड़ाकर आनंद लिया। प्रधानाचार्य संजीव अग्रवाल ने छात्रों को बसंत पंचमी की शुभकामनाएं दी। उधर, डीएमजी इंटर कॉलेज में पूजा कर बसंत मनाया गया। प्रधानाचार्य डॉ. आरके सिंह और मुख्य अतिथि इलाहाबाद बैंक के पूर्व मैनेजर शैलेंद्र कुमार अग्रवाल ने यज्ञ में आहुति दी। आर्य समाजी धर्मपाल सिंह ने वेद मंत्रोच्चारण द्वारा यज्ञ कराया। सम्मलेन में पुरातन छात्र कवि सुमनेश कुमार सुमन, मनोज कुमार मनोज, सुल्तान सिंह सुल्तान तथा रूप किशोर ने कविता सुनाई। वहीं, फैज- ए-आम इंटर कॉलेज के छात्रों नेगरीब बच्चों को पतंगें बांटी। एनसीसी कैडेट शादाब मिर्जा सहित दानिश, इरशाद, फरमान ने मलिन बस्ती में बच्चों को पतंग दीं। उधर, पल्लवपुरम फेज दो स्थित पी पाकेट में मैथिल समाज ने श्री शिव मंदिर में अष्टयाम महोत्सव और सरस्वती पूजा की गई। 251 महिलाओं ने कलशयात्रा निकाली गई। दो फरवरी को अष्टयाम का समापन किया जाएगा। संयोजक कार्तिकेय मैथिल, अध्यक्ष ललित पिंडारूच, पं. प्रेमचंद झा, दयाकांत झा आदि मौजूद रहे। 
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