परिजनों का कहना है कि इमरजेंसी स्टाफ कुर्सियों पर सोता रहा और बार-बार कहने पर भी किसी ने ध्यान नहीं दिया। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब एक कर्मचारी ने एक्स-रे के बिना ही सुनील का पैर काटने की बात कही और दस्तखत कराने की कोशिश की, लेकिन परिजनों ने इसका विरोध किया।
इसके बाद घायल को 'लावारिस' बताकर भर्ती किया गया, लेकिन समय रहते इलाज न मिलने के कारण कुछ देर में ही उसकी मौत हो गई।
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सुबह होते ही ग्रामीणों के साथ माछरा के प्रधान यतेन्द्र शर्मा और ग्राम प्रधान जग्गी मेडिकल पहुंचे और प्राचार्य डॉ. ए.सी. गुप्ता से मुलाकात की। ग्रामीणों ने घटना को लेकर कड़ी नाराजगी जताई और मांग की कि लापरवाह स्टाफ को तत्काल सस्पेंड किया जाए।
प्राचार्य ने मामले की जांच का आश्वासन दिया और कहा कि दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। यह घटना सवाल खड़े करती है कि क्या मेडिकल की आपातकालीन सेवाएं वास्तव में चौकस हैं? एक घायल युवक की जान ऐसे ही कैसे चली गई?