मेरठ। सीसीएसयू समेत उत्तर प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों-कॉलेजों में कुछ कोर्सों को छोड़कर यूजी-पीजी के अधिकतर कोर्सों में परीक्षाएं रद्द करने पर तो फैसला हो गया है लेकिन नंबर मेहनत से ही मिलेंगे। समिति की तरफ से जो सिफारिश की गई है उसमें छात्र-छात्राओं को अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया जाएगा, लेकिन उनको नंबर अगली कक्षा के रिजल्ट के आधार पर मिलेंगे। जो छात्र-छात्राएं फाइनल ईयर में हैं, उनको प्रथम और द्वितीय वर्ष की परीक्षाओं के प्राप्तांक के औसत अंक दिए जाएंगे। ये सिर्फ उन परीक्षाओं पर लागू होगा जोकि अभी हुई नहीं हैं। जो परीक्षाएं हो चुकी हैं उनका मूल्यांकन कराकर ही अंक दिए जाएंगे। इस फॉर्मूले से बिना परीक्षा कराए भी डिग्री की प्रमाणिकता बनी रहेगी। दो जुलाई से इसी फॉर्मूले को पूरे प्रदेश के विवि-कॉलेजों में लागू किए जाने की तैयारी है।
सीसीएसयू के पांच लाख छात्र-छात्राओं समेत प्रदेश के सभी विवि-कॉलेजों में परीक्षाएं अधर में अटकी पड़ी हुई हैं। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए परीक्षा का पूरे प्रदेश में विरोध हो रहा था। इसको देखते हुए प्रदेश सरकार ने सीसीएसयू के कुलपति प्रो. एनके तनेजा की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति का गठन किया गया। इसमें डॉ. भीमराव अंबेडकर विवि आगरा के कुलपति प्रो. अशोक मित्तल, छत्रपति शाहू जी महाराज विवि कानुपर की कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता और डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विवि अयोध्या के कुलपति डॉ. मनोज दीक्षित शामिल रहे। तीन दिन तक सारे पक्ष देखने के बाद समिति ने सोमवार को अपना पक्ष उप मुख्यमंत्री के सामने रख दिया, जिसके बाद प्रदेश में इस बार परीक्षाएं रद्द करने और छात्रों को प्रोन्नति देने पर सहमति बन गई।
चतुर्थ सेमेस्टर के अंकों के आधार पर मिलेंगे अंक
उच्च शिक्षा विभाग के अफसरों के मुताबिक समिति ने जो सुझाव दिए हैं उसमें कहा गया कि अगर कोई छात्र-छात्रा प्रथम वर्ष या द्वितीय सेमेस्टर में है तो उसे द्वितीय वर्ष-तृतीय सेमेस्टर में प्रोन्नत कर दिया जाए। ऐसे प्रोन्नत छात्र वर्ष 2021 की द्वितीय-चतुर्थ सेमेस्टर परीक्षा में शामिल होंगे। इनके समस्त विषयों के प्राप्तांकों के औसत अंक ही उनके प्रथम वर्ष-द्वितीय सेमेस्टर के प्राप्तांक माने जाएंगे। अगर 2021 की द्वितीय वर्ष-चतुर्थ सेमेस्टर की परीक्षा में शामिल होने वाले छात्र बैक या इंप्रूवमेंट के लिए योग्य पाए जाते हैं, तो इसके नियम अलग होंगे। अगर कोई छात्र 2021 में द्वितीय वर्ष या चतुर्थ सेमेस्टर में फेल हो जाता है तो वह 2022 में परीक्षा में फिर से शामिल होगा, तथा इस परीक्षा में उसके द्वितीय वर्ष-चतुर्थ सेमेस्टर के परिणाम के आधार पर ही उसको प्रथम वर्ष 2020 द्वितीय सेमेस्टर 2020 के अंक दिए जाएंगे।
द्वितीय वर्ष-चतुर्थ सेमेस्टर वालों को प्रथम वर्ष-तृतीय सेमेस्टर के प्राप्तांक मिलेंगे
सभी संकायों के द्वितीय वर्ष-चतुर्थ सेमेस्टर के सभी छात्रों को तृतीय वर्ष-पंचम सेमेस्टर में प्रोन्नत कर दिया जाएगा। ऐसे छात्रों को प्रथम वर्ष-तृतीय सेमेस्टर के सभी विषयों के प्राप्तांकों के औसत अंक द्वितीय वर्ष 2020-चतुर्थ सेमेस्टर-2020 में दिए जाएंगे। जो छात्र 2021 की परीक्षा के परिणाम के आधार पर निर्धारित अपनी 2020 के परीक्षा परिणाम से संतुष्ट नहीं होंगे, वे 2021 मं आयोजित होने वाली बैक परीक्षा-2022 में परीक्षा में शामिल होकर अपने अंकों में सुधार कर सकते हैं।
फाइनल में पहले दोनों साल-सेमेस्टर के अंकों का औसत मिलेगा
समस्त संकायों के तृतीय वर्ष-छठे सेमेस्टर के छात्रों को उनके प्रत्येक विषयों में प्रथम तथा द्वितीय वर्ष-प्रथम-पंचम सेमेस्टर के समस्त प्रश्नपत्रों में जो औसत अंक प्राप्त हुए हैं, वही अंक तृतीय वर्ष के उस विषय के प्राप्तांक माने जाएंगे। अगर कोई बीए फाइनल में है तो उसके प्रथम और द्वितीय वर्ष के अंकों के औसत अंक फाइनल में दिए जाएंगे। इसी तरह से अगर कोई एलएलबी छठे सेमेस्टर में है तो उसे प्रथम और पंचम सेमेस्टर के औसत अंकों के प्राप्तांक दिए जाएंगे।
जिनके पेपर हो गए, उन पर लागू नहीं होगा नियम
समिति की सिफारिशों के मुताबिक जो परीक्षाएं हो चुकी हैं उनके नंबर भी जुड़ेंगे। सीसीएसय की बात करें तो बीए, बीकॉम, बीएससी, एमए-एमकॉम प्राइवेट में जितने भी पेपर हो चुके हैं, उनका मूूल्यांकन कैंपस के चार और दूसरे जिलों के सात सेंटरों पर चल रहा है। ऐसे में इन कोर्सों में जो अंक मिलेंगे वह भी जुड़ेंगे। इन परीक्षाओं में प्रोन्नति का नियम लागू नहीं होगा। वहीं मेडिकल और एमफिल पर कोई चर्चा नहीं हुई।