चलो माना तुमने वफाओं के मेरे सब निशान मिटा दिए
मवाना। हस्तिनापुर कस्बा स्थित राजकीय इंटर कॉलेज के क्रीड़ा स्थल पर आयोजित कवि सम्मेलन में कवि हासिम फिरोजाबादी ने कहा कि जो मजलूमों को सताते हैं, जो दंगों को भड़काते हैं, जो नफरत को फैलाते हैं, घरों को आग लगाते हैं, बसा ले दिल में चेहरे या सीनों में रखे इस्लाम, वो हिंदुस्तान छोड़ दें, वो हिंदुस्तान छोड़ दें।
साहित्यिक संस्था साहित्य संगम परिषद् हस्तिनापुर व पत्रिका मौन मुखर के तत्वावधान में राजकीय इंटर कॉलेज में शहीदों और जांबाज सैनिकों को समर्पित विराट कवि सम्मेलन का शुभारंभ डीपीएम ग्रुप आफ एजुकेशन के सचिव जगदीश त्यागी ने फीता काटकर किया। कार्यक्रम के संयोजक एवं परिषद् के सचिव तथा कवि संजीव भ्रमर ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। यहां हास्य रस के कवि सुनहरी लाल वर्मा ने हास्य कविता प्रस्तुत करते कहा कि कोई जलता है तो जलता रहे जलन लेकर, हम जहन्नुम में भी जन्नत का मजा लेते हैं। कवि अमित शर्मा ने कहा कि बनके दधिचि दानवीरता का प्रमाण दे देते हैं, देवों की रक्षा की खातिर अस्थीदान दे देते हैं। समय पडे़ मैं परशुराम हूं केवल भिक्षा पात्र नहीं हूं, संस्कार हूं, हर हिंदू का केवल जाति मात्र नहीं हूं।
बनारस से पधारे कवि डॉ. अनिल चौबे ने कहा कि मुझको तो मिल गया ट्रैफिक हवलदार अर्थकोष आज उसने पलट दिया है। जितने में गाड़ी को कबाडी न कोई ले रहा था, उससे अधिक का चालान काट दिया है। कवि बलबीर सिंह खिचड़ी ने कहा दिल को पाषाण बनाते रहिए, मरते दम तक कमाते रहिए, हूट कविता और छंदों की तरह खिचड़ी संतान बनाते रहिए। कवियित्री मुमताज नसीम ने कहा कि चलो माना तुमने वफाओं के मेरे सब निशान मिटा दिए, मगर इसका मुझको यकीं नहीं, मेरे खत भी तुमने जला दिए। शबे जिंदगी के अंधेरों में जो भटका रहे हो तो क्या करूं, जो चराग मैंने जलाए थे वो चराग तुमने बुझा दिए। मंच संचालन कर रहे डॉ. अर्जुन सिसौदिया ने कहा कि तिरंगे में लिपटे शहीद के शव पर तिरंगा क्या कहता है, जो गाया देश का तुमने तराना याद रखेगा, तुम्हारा मुल्क पर सबकुछ लुटाना याद रखेगा। गए अंदाज जीने और मरने का सिखाकर के तुम्हे सदियों तलक जमाना याद रखेगा। संजीव भ्रमर ने कहा निगाहों की तराजू में बताओ तोल क्या लोगे, विरह के आंसुओं से भी अधिक अनमोल क्या लोगे, तुम्हारे वास्ते मैं जिंदगी कुर्बान कर दूंगा, दोबारा लौट आने का बताओ मोल क्या लोगे। कवि गुनवीर राना, यशपाल फक्कड़ ने अपनी कविता प्रस्तुत की। अध्यक्षता देवेंद्र सिंह पंवार ने की। यहां मोहित सिंह, डॉ. शक्ति साहनी, प्रवेंद्र कुमार भड़ाना, डॉ. अजयवीर गर्ग, डॉ. सुधीर त्यागी, सविता चौधरी, शालिनी भटनागर, गुरुचरण सिंह आदि काफी संख्या में उपस्थित थे।