यह था पूरा प्रकरण
पांच मई 2017 को ग्राम शिमलाना में आयोजित महाराणा प्रताप जयंती में शामिल होने के लिए जुलूस निकालकर जा रहे राजपूत समाज के युवकों पर ग्राम शब्बीरपुर से गुजरते समय पथराव कर दिया गया। जिसके बाद राजपूत समाज के लोगों एवं दलित समाज के लोगों में जमकर संघर्ष हुआ। जिसमें राजपूत समाज के एक युवक की मौत हो गई थी। आरोप है कि आक्रोशित राजपूत समाज के लोगों ने दलित समाज के लोगों के दर्जनों घरों में आग लगा दी थी।
इस घटना के विरोध में नौ मई को भीम आर्मी के कार्यकर्ता गांधी मैदान में एकत्रित हुए। जहां पुलिस ने उन्हें खदेड़ते हुए कुछ लोगों को हिरासत में ले लिया। जिससे भीम आर्मी के कार्यकर्ता भड़क उठे थे। आरोप है कि भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने सहारनपुर के सभी रास्तों को बंद कर दिया। इस दौरान आगजनी, तोड़फोड़, मारपीट की गई। यहां तक कि प्रशासनिक अधिकारियों पर हमला किया गया। एक बस, 14 बाइक और कारें जला दी गईं। रामपुर महनिहारन, बड़गांव, सरसावा सभी जगह हिंसक प्रदर्शन किया गया। इस घटना में चंद्रशेखर उर्फ रावण, जिलाध्यक्ष कमल सिंह वालिया, राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन और राष्ट्रीय प्रवक्ता मंजीत सिंह नौटियाल पर मुकदमे दर्ज किए गए थे।
ग्राम शब्बीरपुर में हुए बवाल के मामले में गांव के लोगों का हाल जानने के लिए बसपा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती 23 मई को पहुंची और सभा की। आरोप है कि सभा से लौटते हुए लोगों पर अंबेहटा चांद में राजपूत समाज के लोगों ने हमला कर दिया था। जिसमें दलित समाज के एक युवक की मौत हो गई थी।
भीम आर्मी के चार पदाधिकारियों पर हुआ था ईनाम
सहारनपुर हिंसा के मामले में चंद्रशेखर उर्फ रावण, जिलाध्यक्ष कमल सिंह वालिया, राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन और राष्ट्रीय प्रवक्ता मंजीत सिंह नौटियाल पर मुकदमे दर्ज किए गए। उसके बाद सभी फरार हो गए।
सभी पर 12-12 हजार रुपये का ईनाम भी घोषित किया था। बाद में एक-एक कर अन्य सभी तो सभी जेल चले गए। जबकि विनय रतन के यहां कुर्की नोटिस चस्पा किया गया था। जिसने बाद में कोर्ट में सरेंडर किया।
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