मेरठ। उत्तर प्रदेश में नगर निकाय चुनावों के परिणाम लगभग घोषित हो गए हैै। अब देखा जाए तो ज्यादातर शहरों में भाजपा का डंका बजा। लेकिन चर्चित शहर मेरठ में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। क्रांतिधरा पर बीजेपी की हार ने साबित कर दिया कि पिछले दस सालों में मेरठ का विकास नहीं हुआ। भाजपा के खोखले वादे ही क्या हार की वजह बनें।
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वहीं एक सवाल ये भी है कि सीएम बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद चुनाव प्रचार के लिए मेरठ आए थे, लेकिन फिर भी ऐसी क्या कमी रही कि भाजपा पर बसपा भारी पड़ गई। क्या मेरठ की जनता भाजपा से खफा हैं? अगर नहीं तो बीजेपी को अपने गढ़ में क्यों धूल चाटनी पड़ गई। ये हाल तब है कि मेरठ जिले में भाजपा के वर्तमान में छह विधायक हैं, और उन्होंने निकाय चुनाव में जीत हासिल करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी।
दिलचस्प बात यह है कि भाजपा के सामने बाकी सभी विपक्षी पार्टियां चारों खाने चित्त रही, केवल बसपा ही भगवा दल के सामने कुछ संघर्ष कर सकी है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पश्चिम यूपी की राजनीति के केंद्र और भाजपा के गढ़ मेरठ में भी मायावती की बसपा ने भाजपा को धूल चटा दी, जहां नीले निशान वाली पार्टी की प्रत्याशी सुनीता वर्मा 234,817 वोट पाकर विजेता रहीं। वहीं भाजपा प्रत्याशी कांता कर्दम को 205,235 मत पाकर दूसरे नंबर से ही संतोष करना पड़ा।
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