सीएम योगी के आगमन स्थल का निरीक्षण करते अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
अकेले मुजफ्फरनगर की पेपर मिलें 17 लाख टन पेपर का उत्पादन करती हैं। इसी तरह लोहा कारोबार में भी जिले का बड़ा नाम है। उत्तराखंड में बिजली सस्ती होने से उत्तर प्रदेश की पेपर मिलों और लोहा फैक्टरियों को कड़ी प्रतिस्पर्द्धा का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए उत्तर प्रदेश में बिजली सस्ती करने की आवश्यकता है।
उद्यमियों के अनुसार, पेपर बनाने के लिए अधिकांश रद्दी विदेशों से आयात होती है, जिसका भाड़ा यहां तक लाने में 4500 रुपये प्रति टन पड़ता है। इसलिए यूपी में ड्राई पोर्ट बनाए जाने के साथ ही भाड़े पर सब्सिडी देने, नए उद्योगों की तरह पेपर मिलों को भी इंसेंटिव देने, उद्योग लगाने के लिए जमीन के सर्किल रेट कम करने, विदेशी कागज पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाए जाने की आवश्यकता है।