माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। गुप्त नवरात्र के चौथे दिन शहर के मंदिरों में मां भुवनेश्वरी की विशेष पूजा की गई। धर्माचार्यों ने चतुर्थ महाविद्या मां भुवनेश्वरी की आराधना करने का आह्वान किया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्र तंत्र साधना के साथ गृहस्थ जीवन में सुख, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि धार्मिक ग्रंथों के अनुसार वर्ष में चार नवरात्र आते हैं। इनमें चैत्र और शारदीय नवरात्र प्रकट नवरात्र कहलाते हैं। माघ और आषाढ़ मास में गुप्त नवरात्र होते हैं। इस दौरान मां दुर्गा के दस महाविद्या स्वरूपों की विशेष साधना की जाती है। शास्त्रों में वर्णित कथाओं के अनुसार ऋषि विश्वामित्र ने इसी काल में साधना कर महान सिद्धियां प्राप्त की थी। रामायण में वर्णित रावण के पुत्र मेघनाद ने भी गुप्त नवरात्र में अपनी कुलदेवी की आराधना कर विशेष शक्तियां अर्जित की।
आचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि साधक नौ दिन तक संयम और ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए प्रतिदिन सुबह-शाम माता के समक्ष घी का दीपक जलाकर लाल पुष्प अर्पित करें और श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करें। लाल कागज पर मनोकामना लिखकर माता के चरणों में रखे। दो लौंग और बताशा या मिश्री का भोग लगाने की भी परंपरा बताई गई है।
ज्योतिषाचार्य विनोद त्यागी ने बताया कि उन्हें मां भुवनेश्वरी को संपूर्ण सृष्टि की अधिष्ठात्री माना जाता है। मान्यता है कि उनकी कृपा से साधक को सुख, समृद्धि, यश, ऐश्वर्य, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। तंत्र शास्त्रों में भी उनकी साधना को अत्यंत प्रभावशाली बताया गया है।