प्रारंभिक अवस्था में यदि हैपेटाइटिस के साथ पीलिया भी हो जाए और इसका उपचार ठीक से न किया जाए तो यह क्रॉनिक बी या सी का रूप ले लेती है। यदि फिर भी उचित इलाज न हो सका तो यह लिवर सिरोसिस में परिवर्तित हो जाती है, इसके फलस्वरूप पूरा लिवर क्षतिग्रस्त हो जाता है और लिवर का कैंसर भी हो सकता है। ऐसे में साफ सफाई का विशेष खयाल रखें और हैपेटाइटिस का टीका जरूर लगवाएं।
हैपेटाइटिस के लक्षण
- बुखार, भूख न लगना, खाने को देखकर जी मिचलाना।
- उल्टी, बदन दर्द, सिगरेट पीने वालों को तंबाकू से अरुचि होना।
- बदन में खुजली, पेट में गड़बड़ी होना।
- आंखों में पीलापन, पेशाब का रंग पीला होना, पैरों में सूजन बढ़ना।
- हर समय जोड़ों में भी दर्द रहना, चिड़चिड़ापन होना।
हैपेटाइटिस से बचने के उपाय
- घाव को खुला न छोड़ें। यदि त्वचा कट फट जाए तो उस हिस्से को डिटॉल से साफ करें।
- शराब पीना बंद कर दें।
- अपने टूथब्रश, रेजर, सुईं, सिरिंज, कैंची आदि वस्तुएं जो आपके खून के संपर्क में आती हों, उन्हें शेयर न करें।