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सेंट्रल मार्केट विवाद: छत बचाने सड़क पर उतरीं महिलाएं, बच्चों संग निकाला जुलूस, गर्मी में प्रदर्शनकारी बेहोश

Mon, 11 May 2026 11:55 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

मेरठ के शास्त्रीनगर में आवास विकास की सेटबैक कार्रवाई के विरोध में महिलाओं ने बच्चों के साथ जुलूस निकाला। प्रदर्शन के दौरान तेज गर्मी में एक महिला बेहोश हो गई। छह दिन से महिलाएं धरना देकर अपने मकानों की सुरक्षा की मांग कर रही हैं।

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मेरठ सेंट्रल मेरठ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेरठ में आवास विकास की नीतियों और सेटबैक (मकान के आगे खाली जगह छोड़ने) की कार्रवाई के विरोध में शास्त्रीनगर सेक्टर तीन और चार की महिलाओं का दर्द और आक्रोश रविवार को सड़क पर फूट पड़ा। सेंट्रल मार्केट में महिलाओं ने अपने बच्चों के साथ हाथों में पोस्टर लेकर जुलूस निकाला और आवास विकास विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पूरा इलाका नारी शक्ति एक है के नारों से गूंज उठा।

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आवास विकास की कार्रवाई के डर और धरने के कारण महिलाएं शारीरिक और मानसिक रूप से टूट रही हैं। रविवार को निकाले गए पैदल मार्च के दौरान चिलचिलाती गर्मी और भूखे पेट होने के कारण कई महिलाओं को चक्कर आने लगे।

इसी दौरान प्रदर्शन कर रही मीता नाम की महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई और बेहोश होकर वहीं सड़क पर गिर पड़ीं। यह देख वहां हड़कंप मच गया। महिलाओं ने तुरंत उन्हें संभाला और एक कार की मदद से पास के अस्पताल ले गईं। प्राथमिक उपचार के बाद महिला को घर भेज दिया गया है।
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आधा पेट खाना खाकर धरने पर बैठीं महिलाएं
शास्त्रीनगर में महिलाएं सेक्टर 3-4 के चौराहे पर और सेक्टर दो में छह दिन से धरना प्रदर्शन कर रही हैं। शुक्रवार को महिलाओं ने राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर के आवास पर धरना प्रदर्शन कर हंगामा किया था। वहीं शनिवार को भी महिलाओं ने अपना धरना जारी रखा। रविवार को महिलाओं ने आवास विकास के खिलाफ जुलूस निकाला।

छह दिन पूर्व धरना शुरू करने वालीं सेक्टर-3 निवासी मीना भार्गव ने भावुक होते हुए कहा, हम आधा पेट खाना खाकर यहां बैठे हैं। हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही है, इसलिए हमें जुलूस निकालना पड़ा। हम मातृ शक्ति हैं और अपनी सभी जिम्मेदारियां निभाते हुए यह लड़ाई लड़ रहे हैं। इस दाैरान कनिका, बीना, ऊषा, सोनिया, बबीता, मुकेश त्यागी, पूनम, लक्ष्मी, हेमलता, कौशल और कमलेश आदि महिलाएं शामिल रहीं।
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मेरठ सेंट्रल मेरठ - फोटो : अमर उजाला
मासूम परिवारों पर बुलडोजर नहीं...
प्रदर्शन के दाैरान बच्चों के हाथों में तख्तियां थीं जिन पर लिखा था बुलडोजर सिर्फ अपराधियों पर, मासूम परिवारों पर नहीं। महिलाओं ने कहा कि वे अपने परिवार के सिर की छत बचाने के लिए सड़कों पर उतरी हैं। जिन मकानों में सेटबैक छोड़ने के लिए दबाव बनाया जा रहा है वे 35 से 40 साल पुराने हैं और उनके नीचे कोई पिलर भी नहीं है।

अगर सेटबैक के नाम पर मकान को आगे से ध्वस्त किया गया तो पूरा घर गिर सकता है। दूसरी ओर आवास विकास परिषद के अधिकारियों का कहना है कि आवंटियों ने आवासीय भूखंडों का मूल स्वरूप ही बदल दिया है। नियमों की अनदेखी करते हुए सेटबैक खत्म करके निर्माण किए गए हैं और आवासीय जगहों पर कॉमर्शियल (व्यावसायिक) भवन खड़े कर दिए गए हैं जिसके चलते सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यह कार्रवाई की जा रही है।
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