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Meerut News: पीतांबर वस्त्र धारण कर सर पर कलश लेकर निकली महिलाएं

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जागृति विहार एक्सटेंशन स्थित वेदांत आश्रम के पावन प्रांगण में शनिवार 11 अप्रैल को वेदांत सत्संग समिति द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह का शुभारंभ श्रद्धा और उत्साह के साथ हुआ।
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कथा से पूर्व सायं 3 बजे से 4 बजे तक शिव मंदिर प्रवेश विहार से भव्य कलश यात्रा निकाली गई। सौभाग्यवती महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर ढोल-नगाड़ों, वेद मंत्रों और जयघोषों के बीच शोभायात्रा को कथास्थल तक पहुंचाया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ माउंट आबू से आए स्वामी जगदानंद सरस्वती और महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद सरस्वती ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। कथा व्यास महामंडलेश्वर स्वामी अभयानंद सरस्वती ने सायं 4 बजे से 6:30 बजे तक श्रीमद्भागवत महापुराण पर तात्विक प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि सभी जीवात्माओं का परम उद्देश्य मोक्ष की प्राप्ति है और इसका सबसे सरल साधन सत्संग है। उन्होंने बताया कि शुकदेव जी की कृपा से महाराज परीक्षित को भागवत कथा रूपी अमृत प्राप्त हुआ। आत्मा का स्वरूप सत, चित और आनंद है तथा वेदों के सिद्धांत श्रीमद्भागवत महापुराण में उदाहरणों के माध्यम से समझाए गए हैं। उन्होंने कहा कि भगवान के नाम, रूप, लीला, गुण और धाम का स्मरण करने से भक्ति सुदृढ़ होती है तथा भागवत कथा से अंतःकरण की शुद्धि, पितरों की तृप्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। कथा के मुख्य यजमान बीडी पांडेय एवं बीना पांडेय ने विधिवत व्यास पूजन किया। अनुपम चैतन्य, वंश अवस्थी, सुभाष शर्मा, मनोज अग्रवाल सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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- कथा में सुदामा चरित्र का वर्णन
- शताब्दी नगर सेक्टर एक में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन वृंदावन से आए कथा व्यास पंडित नेकराम शास्त्री ने आज सुदामा चरित्र का मार्मिक एवं भावपूर्ण वर्णन किया। जिसके साथ ही आज की कथा का विश्राम हुआ। वृंदावन से आए कलाकारों ने ब्रज की होरी के फाग प्रस्तुत किए। सभी ने अबीर-गुलाल लगाकर नृत्य करते हुए भक्ति का आनंद लिया। पंडित कृष्ण लाल सुदामा द्वारा सुदामा चरित्र की सजीव झांकी प्रस्तुत की गई। पंडित मुकेश चंद बृजवासी जी ने अत्यंत भक्ति भाव से पूजन एवं मूल पाठ संपन्न कराया। कार्यक्रम का संचालन महंत तिवारी जी द्वारा किया गया। इस दौरान श्रीकांत सिंह, डॉ. पीएस सैनी, डॉ. सुनील, डॉ. अर्जुन, प्रद्युम्न सिंह, अजीत सिंह, मोहन चंद पंत आदि रहे।
- संक्षय मुक्त होकर हम होते हैं अहंकार मुक्त
- बाबा मनोहरनाथ मंदिर सूरजकुंड पर गोपाल कृष्ण भारद्वाज ने संक्षय रहित मानव ही अहंकार मुक्त हो सकता है। भगवान पर विश्वास कर हम परम शक्ति को प्राप्त करते हैं। कर्म सिद्धांत महत्वपूर्ण है। भगवान के प्रति भाव होना चाहिए। अहंकार का त्याग करें। इस अवसर पर महामंडलेश्वर निलिमानंद महाराज, विवेक वाजपेई, विष्णु पंडित जी, श्वेता, दीप शर्मा, शगुन शर्मा, पुलकित आदि रहे।
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