डीएम से न्याय की गुहार लगाती महिला
- फोटो : अमर उजाला
बीना राणा का कहना है कि प्रशासन सबके वारिस मांग रहा है। ऐसे में जिनके मां-बाप नहीं है, उनके वारिस कहां से लाएं और इन्हें किसके पास छोडे़ं। वहलना के पांच भाई-बहन है, सबकी उम्र 14 साल से कम है। मां-बाप झगडे़ में घर से भाग गए पता नहीं कहां है, दादी पालन कर रही थी, उसकी मौत हो गई। नानी बची है, उसके पास अपने गुजारे की स्थिति नहीं है, हमारे यहां छोड़ गई, अब बताओ इन्हें आश्रम से कैसे निकाल दें। जितने बच्चे यहां है, सबकी ऐसी ही कहानी है। अपने जीते जी हम बच्चों को अनाथ नहीं कर सकते।
बिना राणा समाज के लिए प्रेरणा: बालियान
केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान ने कहा कि अनाथों और दिव्यांगों को अपने बच्चे मानकर उनका पालन पोषण और शिक्षा देने वाली बीना राणा हमारे समाज के लिए उदाहरण हैं। ऐसे लोगों को प्रोत्साहित और सम्मानित किया जाना चाहिए। किसी भी कीमत पर इनका उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा। इस संबंध में वे खुद इस मामले में संबंधित अधिकारियों से बात करेंगे।
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