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बिना आराधना के भावना में विशुद्धि नहीं आ सकती

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प्राचीन दिगबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत मंदिर
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हस्तिनापुर। कस्बे के प्राचीन दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में चल रहे 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान के 15वें दिन 350 परिवारों ने भाग लिया। विधान की शुरूआत मुख्य वेदी में विराजमान त्रयतीर्थंकर शांति, कुन्थु, अरहनाथ भगवान के अभिषेक से हुई। त्रिमूर्ति जिनालय में विधि विधानपूर्वक जिनेंद्र भगवान का अभिषेक किया गया। शांतिधारा ममता जैन, रविंद्र जैन, सम्यक जैन, मानसी जैन, वंश जैन, गीता जैन, राज कुमार जैन ने की। सभी महानुभावों का मंगल तिलक, माल्यार्पण कर बहुमान दिया।
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श्री शांतिनाथ विधान के मध्य बाल ब्रह्मचारी सुनीता दीदी ने श्रद्धालुओं से कहा कि इस विधान में द्वितीय वलय में चार प्रकार की आराधना व बारह भावनाओं का चिंतन किया गया है। बिना आराधना के भावना में विशुद्धि नहीं आ सकती है। इसलिए दर्शन, ज्ञान, चारित्र, तप ये चार आराधना अनित्य आदि बारह भावनाओं की वृद्धि में सहायक है। हे जीव! अनित्य पर तूने राग किया है अनित्य ही रहेगा, नित्य हो नहीं सकता है। क्षण भंगुर द्रव्य से राग किया है। जल के बुलबुले के समान इस तन पर राग किया है, जो जलकर राख हो जाएगा। तन-धन, यौवन तो इंद्र धनुष के समान नश्वर है। ये तन जो तेरे साथ नहीं जाएगा तेरा है ही नहीं। तूने चैतन्य अविनाशी आत्मा पर ध्यान नहीं दिया जो तेरा है। धन, दौलत, ख्याति, पूजा, दुकान, मकान सब अनित्य है। तूने नित्य स्वभावी आत्मा को इन अनित्य द्रव्यों में नित्य लगाया है, इसी कारण तुझे अनित्य पर्याय प्राप्त हुई पर नित्य (सिद्ध पर्याय) आज तक प्राप्त नहीं हुई। ऐसे अनित्य भाव का चिंतन करते हुए ऐसे अविनाशी पद को प्राप्त कर आत्म कल्याण करें।
अनुष्ठान को पंडित आशीष जैन शास्त्री ने मांगलिक क्रियाएं संपन्न कराई। इस मौके पर क्षेत्र के अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, उपाध्यक्ष सतेंद्र कुमार जैन, राजीव जैन, जितेंद्र कुमार जैन, अनिल जैन, विजय कुमार जैन, महाप्रबंधक मुकेश कुमार जैन, उमेश जैन, अतुल जैन, कमल जैन, नवनीत जैन आदि का सहयोग रहा।
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