खरखौदा(मेरठ)। मोटा मुनाफा कमाने के लालच में नियमों को ताक पर रख कर क्षेत्र में कोल्हू संचालन शुरू हो गया है। बिना किसी मानक के सीजन से पहले ही इस बार क्षेत्र में चार कोल्हू तो संचालित हो गए हैं, वहीं करीब 30 के श्राद्ध पक्ष के बाद संचालन की तैयारी हो रही है। वहीं दस कोल्हू की क्षमता एक सल्फर भी क्षेत्र में चालू किया जा रहा है।
खरखौदा क्षेत्र के गांव पांची, कैली, लालपुर, सेतकुआ सहित कई गांवों में दो दर्जन से अधिक गन्ना कोल्हुओं का संचालन होता है। यहां पर किसी भी प्रकार के मानक को पूरा नहीं किया जाता। कोल्हू संचालक मानकों की ओर ध्यान इसलिए भी नहीं देत क्योंकि उन्हें किसी प्रकार की कार्रवाई का कोई भय नहीं है। पिछले साल संचालित हुए 24 कोल्हू में से करीब 10 ने हीं नियमों का पालन किया था लेकिन बाकि किसी के यहां भी कोई जांच नहीं हुई। जिसका नतीजा यह है कि एक ही सीजन में 15 से 20 लाख रुपये कमाने के लालच में यहां हर साल कोल्हू की संख्या बढ़ जाती है। इस बार तो यहां एक सल्फर भी लगाया जा रहा है, जो कि अकेले ही दस कोल्हू की क्षमता रखता है।
क्षेत्र में कोल्हू अधिक होने की मुख्य वजह
हापुड़ से मेरठ तक आलू की बेल्ट है। इस क्षेत्र में गन्ने सहित आलू की भी बडे़ पैमाने पर खेती की जाती है। अक्तूबर माह में आलू की फसल की बुआई शुरू हो जाती है। लेकिन गन्ना मिलों के पेराई सत्र में अभी समय होने के कारण आलू की बुआई के लिए खेतों के गन्ने को कैसे खाली किया जाए। इसी समस्या से परेशान यहां के किसान अपने गन्ने को औने-पौने दामों में कोल्हुओं पर बेच देते हैं। जिस कारण इस क्षेत्र में इन कोल्हुओं को उचित मात्रा में कम कीमत पर गन्ना उपलब्ध हो जाता है।
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी योगेंद्र कुमार के मुताबिक इस वर्ष सभी कोल्हुओं को बोर्ड से एनओसी लेनी होगी तथा सभी मानक पूरे करने होंगे। इसके बाद ही संचालक शुरू होगा।