यूपीसीडा के प्लॉट पर नहीं देनी होगी दोहरी स्टांप ड्यूटी
मेरठ। यूपीसीडा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देगा। इसके लिए समायोजन की प्रक्रिया सरल की है। समायोजन से पहले लीज डीड के निष्पादन की आवश्यकता हटा दी है। जिससे आवंटियाें को दोहरी स्टांप ड्यूटी नहीं देनी पडे़गी।
यूपीसीडा के आरएम सतीश कुमार ने बताया कि प्राधिकरण में संयुक्त रूप से आवंटित भूखंडों को अब विधिवत रूप से समायोजित मान लिया जाएगा। इस प्रकार नक्शा और उपयोग के निर्माण की प्रक्रिया को सरल बनाकर पुराने आवंटियों को नई दर के आधार पर देय समायोजन शुल्क से बचाया जा सकेगा। 100 करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट लगाने के लिए दो या उससे अधिक भूखंडों को जोड़ने के लिए आपत्ति समय घटाकर 15 दिन कर दिया है। समायोजन मामलों का त्वरित निस्तारण होगा। वर्तमान में ई-कॉमर्स में गोदामों और लॉजिस्टिक पार्को की आवश्यकता देखते हुए प्राधिकरण ने औद्योगिक भूमि पर वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक इकाइयों तथा पार्क गतिविधियों को उद्योग के रूप में माने जाने के फैसले को मान लिया है। भूजल संरक्षण के तहत अब आवंटियों को भवन निर्माण की स्वीकृति देने से पहले रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा। प्राधिकरण की कार्य प्रणालियों को सुगम बनाएगा। मुख्य कार्यपालक अधिकारी के निर्देशानुसार प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। जिससे आवंटियों को उत्पादन शुरू होने की तारीख की पुष्टि, लीज डीड के निष्पादन जैसी सुविधाओं के लिए कार्यालय में आने की आवश्यकता न पडे़। प्राधिकरण एक नवंबर से असफल आवेदनों के स्वत: रिफंड की प्रक्रिया शुरू करेगा। वहीं, वाणिज्यिक और समूह आवास भूखंडों के विपणन का ई-ऑक्शन के माध्यम से शुभारंभ करेगा।