वीरेन्द्र के यहां से तिब्बती मृग के सींगों से बनी भस्म, हाथी के दांतों का बुरादा, हाथी के दांतों के टुकडे़, पूठ संरक्षित पौधे की जड़ बरामद की गई। इस दौरान दो दुकानें भी सील की गईं।
मामले की तह तक पहुंचने में जुटी वन विभाग की टीम
वन्य जीवों के अंग बरामद करने के बाद अब वन विभाग इस गोरखधंधे की तह तक पहुंचने में जुट गया है। नगर में दर्जनों ऐसी आयुर्वेदिक दुकानें है, जिनमें आसानी से ये प्रतिबंधित सामान उपलब्ध हो जाते हैं।
वहीं, तीनों आरोपियों को पकड़कर वन विभाग कार्यालय पर लाया गया, जहां पर सूचना पर पहुंचे वन विभाग के एसडीओ कल्याण सिंह ने उनसे करीब तीन घंटे पूछताछ की। शनिवार दोपहर तीनों आरोपियों को कोतवाली लाया गया।
यहां पर वन रक्षक संजय कुमार ने तीनों आरोपियों के खिलाफ वन्य जीवन संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 9, 39, 39डी, 42, 44, 49, 49बी, 50 व 51 के अंतर्गत गैर जमानती अपराध की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई। कोतवाल अजय शर्मा का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।
बरामद किए गए अवशेष
जीव का नाम अंगों की संख्या
पटड़ा गोह जननांग केे -4 नग
सेह के कांटे -31 नग
पूठ संरक्षित पौधे की जड़ -2.880 किग्रा
तिब्बती मृग के सींगों की भस्म -500 ग्राम
हाथी के दांत का बुरादा -21.100 किग्रा
हाथी के दांत के टुकड़े -6 छोटे टुकडे़
मर्दानी ताकत और तंत्र-मंत्र में होता है इस्तेमाल
एसडीओ कल्याण सिंह ने बताया कि बरामद अवशेषों का इस्तेमाल तंत्र-मंत्र में किया जाता है। इसके अलावा मर्दाना ताकत बढ़ाने की दवा बनाने के नाम पर भी इनका प्रयोग किया जाता है। वन क्षेत्राधिकारी राजपाल और वन दरोगा रविकांत चौधरी ने बताया कि बरामद अवशेषों की कीमत का अभी आंकलन नहीं किया गया है। इसकी कीमत 15-20 लाख या उसे अधिक हो सकती है।
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