शूटर शिकारी प्रशांत विश्नोई के घर से बरामद किया गया 117 किलो मांस की जांच के सैंपल लेने के लिए मंगलवार को वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से तीन सदस्य टीम पहुंची। सैंपल वन विभाग के स्टॉफ ने विशेषज्ञों की निगरानी में भरे। मांस के 47 पैकेट से सैंपल लेने में करीब तीन घंटे लग गए। माइनस 20 डिग्री तापमान में प्रिजर्व किया गया मास इतना ठोस था कि उसे काटने में पसीने छूट गए।
वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया देहरादून से तीन सदस्य टीम वैज्ञानिक डॉ. सम्राट मंडल, डॉ. विभाष पांडव और पॉल पहुंचे। पॉल इंस्टीट्यूट से पीएचडी कर रहे हैं। वन विभाग ने एक्सपर्ट को इसलिए बुलाया था कि मांस के सैंपल लेने में कोई गलती न हो। मेरठ जोन के मुख्य वन संरक्षक मुकेश कुमार, वन संरक्षक ललित कुमार वर्मा और डीएफओ अदिति शर्मा के निर्देशन में मांस की सैंपलिंग हुई। हर पीस काटने के लिए अलग ब्लेड, अलग ग्लब्ज, अलग कंटेनर था। हर पीस लेने के बाद हाथ धोए गए। सैंपल लेने के लिए विभाग ने 47 कंटेनर मंगाए थे। कंटेनर में इथेनॉल डालकर 15 से 20 ग्राम मांस का पीस काटकर रखा गया। उसके बाद सीरियल नंबर और पीस नंबर डालकर उसे संरक्षित किया गया। पौने एक बजे से पौने चार बजे तक सैंपलिंग चली।
डीएनए से होगी जांच
डॉ. सम्राट मंडल ने बताया मांस से डीएनए लेकर उसकी जांच की जाएगी। हर जानवर का डीएनए अलग होता है। उससे पता चल जाएगा कि मांस किस जानवर का है। मुख्य वन संरक्षक का कहना है मांस की जांच रिपोर्ट केस के लिए काफी अहम है। मांस नीलगाय का है, हिरन या किसी अन्य जानवर का यह पता चलेगा।
कोर्ट के आदेश पर मांस होगा नष्ट
मांस की सैंपलिंग हुई है। 15 से 20 दिन में रिपोर्ट आने की उम्मीद है। डीएफओ अदिति शर्मा का कहना है वन विभाग कोर्ट को इसकी सूचना दे चुका है, इसलिए मांस को रिपोर्ट आने के बाद सीजेएम कोर्ट के आदेश पर नष्ट किया जाएगा। तब तक डीफ फ्रीजर में मांस प्रिजर्व रहेगा।