कर्नल की कोठी में मिले अवैध असलहे, कारतूस और वन्य जीवों की खाल-सींग मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। इस मामले में शहर केवरिष्ठ अधिवक्ताओं से बात की गई तो उनका कहना है कि इसमें कानून की नजर में कर्नल भी आरोपी हैं। वे ही नहीं, उनकी पत्नी, बहू या जो भी इस घर में रहता है, वह आरोपी बनाया जाना चाहिए, क्योंकि वन्य जीवों की खालें आदि छिपाकर रखी हुई नहीं थी। कर्नल और उनके परिवार ने गेट न खोलकर और सीओ को धमकाकर सरकारी काम में भी बाधा पहुंचाई।
अधिवक्ता अनिल बख्शी का कहना है कि जो भी घर में मौजूद था, वह आरोपी है। उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जानी चाहिए। इस केस में ऐसा नहीं लगता है कि कर्नल, उनकी पत्नी या बहू इसकी जानकारी नहीं थी कि घर में अवैध हथियार, मांस और वन्य जीवों के सींग आदि हैं। उन्हें पुलिस को इसकी सूचना देनी चाहिए थी। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, लिहाजा उन पर भी कार्रवाई बनती है।
अधिवक्ता ओपी शर्मा ने बताया कि कर्नल की कोठी में अवैध हथियार रखे हुए थे, वन्य जीवों के अवशेष थे और उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी, यह कैसे संभव है। जो भी घर में रह रहा है, यह सबकी जिम्मेदारी है, वह इसकी जानकारी पुलिस को दें, नहीं दी तो वह भी इस मामले में आरोपी होने चाहिए। इसमें क्या धारा बनती है, यह डीआरआई या वन्य जीव वाले रिपोर्ट लिखाएंगे तो ही साफ हो पाएगा। लेकिन सामन्यत: 25 आर्म्स एक्ट, वन्य जीव संरक्षण, गन उठाने के मामले में सरकारी कार्य में बाधा डालने, जान से मारने की धमकी देने का केस बनता है।
अधिवक्ता परवेज का कहना है कि अगर कोई पढ़ा लिखा कानून को जानने वाले व्यक्ति के घर में गैर कानूनी हथियार, कारतूस, वन्य जीवों के सींग, मांस आदि मिलते हैं तो वह सिर्फ बेटे को आरोपी कैसे कह सकता है। वह यह कहकर अपने को इससे अलग नहीं कर सकता कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। वह वन्य जीव संरक्षण अधिनियम और आर्म्स एक्ट केतहत आरोपी बनाए जाने चाहिए। कानून केतहत वह आरोपी हैं।