गौरतलब है कि आईओसीएल से संजय कुमार के रतिराम खूबचंद ऑयल डिपो को केरोसिन ऑयल की सप्लाई हो रही थी। डिपो की लिमिट 48000 लीटर प्रतिमाह थी। यहां से तेल सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेताओं को वितरित होता था। सात सितंबर को छापा मारा गया तो डिपो के रिकार्ड के मुताबिक 48000 लीटर केरोसिन वितरित होने के बाद स्टॉक शून्य था।
जब ऑयल डिपो में मौजूद टैंकरों की गहनता से जांच हुई तो वहां पर 71 हजार लीटर से अधिक तेल का अवैध स्टॉक पाया गया। जांच के दौरान टीम को आभास हुआ कि भूमिगत टैंक से जुड़े अन्य टैंक भी हैं। मामले में आपूर्ति विभाग की तरफ से फर्म मालिक संजय कुमार और प्रबंधक विक्की के खिलाफ परतापुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया।
जिलाधिकारी ने प्रशासनिक जांच एडीएम सिटी अजय तिवारी को सौंपी। एडीएम सिटी ने 16 बिंदुओं पर इंडियन ऑयल कारपोरेशन से जवाब मांगा, लेकिन दो माह बाद भी मात्र 3-4 बिंदुओं पर ही संतोषजनक जवाब मिल पाया है।
स्वयं उपस्थित होने के बजाए भेज रहे पत्र
एडीएम सिटी अजय तिवारी का कहना है कि आईओसीएल के अधिकारी आएं और जवाब दें तो जांच तेजी से आगे बढ़ सकती है। आईओसीएल के पत्र में गोलमोल जवाब होते हैं। जिस पर फिर से पत्र लिखकर जवाब मांगा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में समय खिंच रहा है। अब पत्र भेजकर आईओसीएल के निदेशक स्तर के अधिकारी को मौजूद होने का निर्देश दिया गया है।
जांच अधिकारी के पाले में गेंद
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार अब इस मामले में पूरी गेंद दर्ज मुकदमे के जांच अधिकारी के हाथ में है। वह चाहते तो अभी तक आगरा स्थित पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (पीईएसओ) को पत्र लिखकर वहां से तकनीकी टीम को भूमिगत टैंकों की खोदाई के लिए बुला सकते थे। टैंकों की खुदाई के बगैर पूरी जांच अधर में लटकी हुई है।