फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डब्ल्यूएचओ की चौंकाने वाली रिपोर्ट, 20 साल बाद मेरठ में होंगे जीरो वाटर के हालात

Sat, 24 Nov 2018 10:07 AM IST
अमित मुदगल, अमर उजाला, मेरठ
विज्ञापन
water
विज्ञापन

लगातार हो रहे जल दोहन और बारिश के पानी को संजोकर न रखने की प्रवृति से मेरठ भारी जल संकट की ओर बढ़ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक मेरठ समेत 21 शहर ऐसे हैं जिनमें डे जीरो यानी जीरो वाटर के हालात पैदा हो रहे हैं। यदि यही हाल रहा तो 2040 तक इन शहरों में पीने का पानी खत्म हो जाएगा। नीर वाटर फाउंडेशन ने इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर कार्ययोजना तैयार की है।

विज्ञापन


डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट कहती है कि देश के21 शहर डे जीरो के कगार पर हैं और तेजी से जलदोहन के चलते इन शहरों में बीस साल बाद पेयजल पूरी तरह से खत्म होने की आशंका जताई गई है। ये शहर शिमला, मेरठ , दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, जयपुर, कानपुर, धनबाद, जमशेदपुर, अमरावती, आसनसोल, विशाखापत्तनम, मुंबई, सोलापुर, हैदराबाद, विजयवाड़ा, कोच्चि, बंगलूरू, चेन्नई, कोयम्बटूर व मदुरै हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें आधे शहर देश के समुद्र तटीय इलाकों पर बसे हैं। 

बारिश का पानी नहीं समेटा
इस बार झमाझम बारिश हुई। कई सालों बाद बादल झूमकर बरसे। बावजूद इसके हम इस पानी को समेट नहीं पाए। इसका परिणाम यह रहा कि सारा पानी बह गया। यदि इस पानी को तालाबों में समेट लिया जाता तो स्थिति में सुधार होता।

विज्ञापन

नीर ने कार्ययोजना तैयार की
नेशनल एनवायरमेंटल एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन (नीर) ने इस रिपोर्ट को आधार बनाकर कार्ययोजना तैयार की है। हिंडन सफाई अभियान में जुटे इस फाउंडेशन ने इस बाबत शासन को पत्र लिखा है। कहा है कि गांव गांव तालाबाें पर काम हो, जल संचय हो। जल्द ही लखनऊ में टीम सदस्य जाकर इस बाबत मीटिंग भी करेंगे।

मेरठ पर एक नजर
-गंगा यमुना नदी दोआब क्षेत्र
-35 लाख की आबादी
-663 गांव, 12 छोटे कस्बे, एक नगर निगम, तीन तहसील, 12 ब्लॉक
-49 प्रतिशत आबादी शहरी, 51 प्रतिशत ग्रामीण
-सालाना वर्षा का औसत 741 मिमी
-कृषि भूमि 2 ताख तीन हजार 350 हेक्टेयर
-55 हजार ट्यूबवेल और बोरवेल

कृषि क्षेत्रफल
गन्ना : 136351 हेक्टेयर
गेहूं : 82000
धान : 18860

सिंचाई साधन
नहरें : 40193 हेक्टेयर
सरकारी नलकूप : 6483
प्राइवेट नलकूप : 53498

बारिश मेरठ
वर्ष       मिमी
2010     488
2011     387
2012      597
2013      489
2014      360
2015       512
2016       575
2017       398
2018       940

भूगर्भ जल दोहन की स्थिति
ब्लाक  
     रिचार्ज     दोहन      दोहन प्रतिशत
दौराला       7977      5596      70
हस्तिनापुर   14135     10958    77
जानी        11951    4094       34
खरखौदा     8103        8067    99
माछरा       8610       7805      90
मवाना       10806      8312     76
मेरठ        3715      3422       92
परीक्षितगढ़   10520     9830     93
रजपुरा       4971      5313      104
रोहटा        8322     4734       56
सरधना     15500    7791        50
सरूरपुर     10537    4856     4637
(रिचार्ज मीटर प्रति हेक्टेयर में है। )
 
विज्ञापन

water
तालाब पर कब्जे
मेरठ जिले में 5,119 तालाब सरकारी रिकार्ड में दर्ज हैं। इनमें से आधे से ज्यादा विलुप्त हो चुके हैं। वहीं जो बचे हैं, उन पर भी कब्जे किए जा रहे हैं। महानगर में 242 लापता तालाबों में से 18 एमडीए, 8 आवास एवं विकास परिषद और 216 नगर निगम के हैं। एमडीए की कई कालोनियां इन्हीं तालाबों पर बन गई हैं। यदि तहसील स्तर पर तालाबों की स्थिति पर नजर डालें तो सदर के 126, मवाना में 112 और सरधना के 85 तालाबों पर कब्जे हैं। काफी का अस्तित्व खत्म है।

लगातार गिरते जा रहे जलस्तर, अत्यधिक दोहन ने हालत खराब कर दी है। पानी के स्रोत कम हो रहे हैं। तालाब सूखे पड़े हैं। हमने डब्लयूएचओ की रिपोर्ट पर काम शुरू किया है। रिपोर्ट कहती है कि यदि यही हाल रहा तो वर्ष 2040 में मेरठ समेत 21 शहरों में पीने योग्य पानी पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा।
-रमन त्यागी, संस्थापक नीर फाउंडेशन

जल का गणित समझना होगा
जैसे बैंक में एकाउंट खुलवाकर उसमें से रकम निकालते रहते हैं, भूगर्भ जल का भी यही गणित है। हम कितना जल भूगर्भ में भेज रहे हैं और कितना निकाल रहे हैं यह समझना होगा। यदि रिचार्ज वाटर से दोहन का प्रतिशत पचास से ज्यादा है तो यह स्थिति खराब है। फिलहाल यही हो रहा है और यह हालात ठीक नहीं हैं।
-अमोद कुमार, अधिशासी अभियंता, भूगर्भ जल विभाग लखनऊ

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें


https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें