नीर ने कार्ययोजना तैयार की
नेशनल एनवायरमेंटल एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन (नीर) ने इस रिपोर्ट को आधार बनाकर कार्ययोजना तैयार की है। हिंडन सफाई अभियान में जुटे इस फाउंडेशन ने इस बाबत शासन को पत्र लिखा है। कहा है कि गांव गांव तालाबाें पर काम हो, जल संचय हो। जल्द ही लखनऊ में टीम सदस्य जाकर इस बाबत मीटिंग भी करेंगे।
मेरठ पर एक नजर
-गंगा यमुना नदी दोआब क्षेत्र
-35 लाख की आबादी
-663 गांव, 12 छोटे कस्बे, एक नगर निगम, तीन तहसील, 12 ब्लॉक
-49 प्रतिशत आबादी शहरी, 51 प्रतिशत ग्रामीण
-सालाना वर्षा का औसत 741 मिमी
-कृषि भूमि 2 ताख तीन हजार 350 हेक्टेयर
-55 हजार ट्यूबवेल और बोरवेल
कृषि क्षेत्रफल
गन्ना : 136351 हेक्टेयर
गेहूं : 82000
धान : 18860
सिंचाई साधन
नहरें : 40193 हेक्टेयर
सरकारी नलकूप : 6483
प्राइवेट नलकूप : 53498
बारिश मेरठ
वर्ष मिमी
2010 488
2011 387
2012 597
2013 489
2014 360
2015 512
2016 575
2017 398
2018 940
भूगर्भ जल दोहन की स्थिति
ब्लाक रिचार्ज दोहन दोहन प्रतिशत
दौराला 7977 5596 70
हस्तिनापुर 14135 10958 77
जानी 11951 4094 34
खरखौदा 8103 8067 99
माछरा 8610 7805 90
मवाना 10806 8312 76
मेरठ 3715 3422 92
परीक्षितगढ़ 10520 9830 93
रजपुरा 4971 5313 104
रोहटा 8322 4734 56
सरधना 15500 7791 50
सरूरपुर 10537 4856 4637
(रिचार्ज मीटर प्रति हेक्टेयर में है। )
तालाब पर कब्जे
मेरठ जिले में 5,119 तालाब सरकारी रिकार्ड में दर्ज हैं। इनमें से आधे से ज्यादा विलुप्त हो चुके हैं। वहीं जो बचे हैं, उन पर भी कब्जे किए जा रहे हैं। महानगर में 242 लापता तालाबों में से 18 एमडीए, 8 आवास एवं विकास परिषद और 216 नगर निगम के हैं। एमडीए की कई कालोनियां इन्हीं तालाबों पर बन गई हैं। यदि तहसील स्तर पर तालाबों की स्थिति पर नजर डालें तो सदर के 126, मवाना में 112 और सरधना के 85 तालाबों पर कब्जे हैं। काफी का अस्तित्व खत्म है।
लगातार गिरते जा रहे जलस्तर, अत्यधिक दोहन ने हालत खराब कर दी है। पानी के स्रोत कम हो रहे हैं। तालाब सूखे पड़े हैं। हमने डब्लयूएचओ की रिपोर्ट पर काम शुरू किया है। रिपोर्ट कहती है कि यदि यही हाल रहा तो वर्ष 2040 में मेरठ समेत 21 शहरों में पीने योग्य पानी पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा।
-रमन त्यागी, संस्थापक नीर फाउंडेशन
जल का गणित समझना होगा
जैसे बैंक में एकाउंट खुलवाकर उसमें से रकम निकालते रहते हैं, भूगर्भ जल का भी यही गणित है। हम कितना जल भूगर्भ में भेज रहे हैं और कितना निकाल रहे हैं यह समझना होगा। यदि रिचार्ज वाटर से दोहन का प्रतिशत पचास से ज्यादा है तो यह स्थिति खराब है। फिलहाल यही हो रहा है और यह हालात ठीक नहीं हैं।
-अमोद कुमार, अधिशासी अभियंता, भूगर्भ जल विभाग लखनऊ
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