मेरठ। जनवरी-2020 तक दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे चालू करने का दावा करने वाले केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के निर्देश पर काम ने रफ्तार पकड़ी है, लेकिन चौथे चरण में डासना से मेरठ तक 32 किमी के बीच होने वाले काम में कई स्थानों पर जमीन का झंझट है। इसके निजात के लिए एनएचएआई ने नया प्लान तैयार किया है।
परतापुर स्थित दिल्ली-मेरठ रेलवे लाइन के बहादरपुर गांव की ओर आरओबी को जोड़ने के लिए पिलर खड़े हो गए हैं। यह काम पिछले एक सप्ताह में किया गया। इस आरओबी को जोड़ने के लिए गाटर भी रखे हैं। इस स्थान पर बीते पांच माह से काम सुस्त गति से चल रहा था। अमर उजाला ने कई बार इस मामले को प्रमुखता से उठाया। इसके बाद एनएचएआई ने काम को रफ्तार से कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए।
यहां फंसा है पेच
चौथे चरण में कई स्थानों पर जमीन का पेच फंसा है। इसमें डासना, कुसालिया, नाहल, रसूलपुर सिकरोड शामिल हैं। इन चारों गांवों की जमीन का 50 करोड़ से ज्यादा का मुआवजा बांटा जाना है। किसानों के विरोध के चलते यहां अभी बात नहीं बन रही है। इस संबंध में कई बार किसानों और अधिकारियों की बैठक हो चुकी है। फिलहाल मामला शासन में लंबित है। पिछले माह एक्सप्रेस-वे की समीक्षा बैठक में कमिश्नर अनीता मेश्राम ने इस मामले को सुलझाने का दावा किया था।
नहीं हो रहा पानी का छिड़काव
एनएचएआई की तरफ से एनएच-58 पर बन रही सर्विस रोड पर धूल उड़ रही है। शनिवार को पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) अध्यक्ष भूरे लाल ने एनएचएआई पर 90 लाख का जुर्माना लगाया था। इसके बाद भी एनएचएआई सर्विस रोड पर मिट्टी की खुदाई के बाद वहां रोड़ी नहीं डलवा रहा है। इस कारण धूल उड़ रही है। साइट कार्यालय पर भी पानी छिड़काव का कोई इंतजाम नहीं है।