सरधना। मेला बूढ़ा बाबू में बुधवार की रात मेला परिसर में ऑल इंडिया मुशायरे का आयोजन किया गया। शायरों ने गजल और शायरी के कलाम पेश किए। क्षेत्रीय विधायक अतुल प्रधान व पूर्व चेयरमैन निजाम अंसारी ने फीता काटकर कार्यक्रम का आगाज किया। शायरों ने देशभक्ति और प्यार मोहब्बत के अल्फाजों को खूबसूरती के साथ अपनी शायरी में पेश किया।
रामलीला ग्राउंड में आयोजित ऑल इंडिया मुशायरे में वरिष्ठ समाजसेवी आगा ऐनूदीन शाह ने शमा रोशन की। शुरूआत शायर काविश रदोलवी ने नात ए कलाम पेश करते हुए की। मशहूर शायर अल्ताफ जिया ने पढ़ा कि या तो ये जगह वो है जो बाजार नहीं है या मेरा यहां कोई खरीदार नहीं है। सिकंदर हयात गड़बड़ ने पढ़ा कि बात जो दिल में थी ससुर जी अब फेस टू फेस करने आया हूं। तूने बेटी भी दी रिजेक्ट मुझे, उसको रिप्लेस करने आया हूं।
इस्माइल नजर देवास ने पढ़ा कि वतन की अपने आलम में अलग पहचान हो जाए, हमारा मुल्क दुनिया का सुल्तान हो जाए। जहां रहमान को हो दर्द, आंसु राम के निकलें।
खुदा पहले के जैसा ही, ये हिंदुस्तान हो जाए।
मशहूर शायर अजहर इकबाल ने सुनाया कि घुटन सी होने लगी उसके पास जाते हुए, मैं खुद से रूठ गया हूं उसे मनाते हुए...।
शायरा निकहत अमरोही ने कहा कि वक्त की भीड़ में हरगिज नहीं खोने दूंगी, मैं तुझे किसी और का होने नहीं दूंगी, तूने छीनी है मेरी आंखों से नीदें, मैं भी तुझे चैन से सोने नहीं दूंगी। खुशबू शर्मा की शायरी खुशबू शर्मा की आंसुओं को मेरी पलकों पे सजाने वाले, तू बता, क्या तुझे भी किसी की तन्हाई रुलाने वाली है, जिसकी हंसी में भी दर्द की आवाज छुपी हो, उसके लबों पे मुस्कान फिर से लाने वाले...।
वहीं शायरा मेहनाज ने अपने दर्शकों को इश्कियां शायरी और नज्म पढ़कर रात की खूबसूरत चांदनी रात में चार चांद लगाए।
मुशायरे की अध्यक्षता समर कुरैशी, आगा ऐनुदीन शाह और संचालन नदीम फारूख ने किया। इस दौरान फरमान अंसारी, हाजी मन्नान, शकील मिर्जा, डॉ. राहत, फिरदौस कासिम, दानिश्ता, तारिक हसन, सूर्यदेव त्यागी, विनोद जैन, सुहेल शाह, शाहवेज अंसारी, हाजी इशाक, विक्रम त्यागी आदि मौजूद रहे।
ऐतिहासिक मेला बूढ़ा बाबू मेले में ऑल इंडिया मुशायरे में मंच पर मौजूद मुख्य अतिथि व शायर। संवाद