शहर के युवाओं को पता ही नहीं चला और वे एचआईवी और हेपेटाइटिस बी व सी के चक्रव्यूह में फंस गए। सरकारी अस्पतालों के कैंपों में किए गए रक्तदान की रिपोर्ट आई तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। जिला अस्पताल और मेडिकल में एक साल के दौरान 524 रक्तदान करने वाले ऐसे निकले। इनमें 19 एचआईवी पॉजिटिव थे, जबकि बाकी हेपेटाइटिस बी और सी से पीड़ित। ये रिपोर्ट देखकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इन लोगों से संपर्क किया और इलाज शुरू कराया। इनमें अधिकांश 20 से 40 उम्र के हैं। इन रोगियों को खून की जांच होने से पहले जानकारी नहीं थी कि वे इन बीमारियों से ग्रसित हैं।
जांच के बाद करा नष्ट करा दिया खून
मेडिकल के ब्लड बैंक द्वारा लगाए कैंपों में एक अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2017 तक रक्तदान करने वाले 314 लोग संक्रमित निकले हैं। इनमें 11 एचआईवी पॉजिटिव थे, 120 हेपेटाइटिस-सी और 183 हेपेटाइटिस-बी से पीड़ित थे। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक द्वारा लगाए गए कैंपों में आठ लोग एचआईवी पॉजिटिव, 97 हेपेटाइटिस-बी और 105 हेपेटाइटिस-सी से पीड़ित निकले। मेडिकल के ब्लड बैंक इंचार्ज डॉ. सचिन ने बताया कि जांच के बाद बीमार लोगों का खून नष्ट कर दिया जाता है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. कौशलेंद्र सिंह ने बताया कि इनका इलाज शुरू किया गया।
ये लक्षण
एचआईवी
एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनो डिफिशिएंसी वायरस) एक ऐसा वायरस है, जिसकी वजह से एड्स होता है। यह वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलता है। जिस इंसान में इस वायरस की मौजूदगी होती है, उसे एचआईवी पॉजिटिव कहते हैं। आमतौर पर लोग एचआईवी पॉजिटिव होने का मतलब ही एड्स समझने लगते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। एचआईवी के शरीर में दाखिल होने के बाद शरीर की प्रतिरोधक क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है और शरीर पर तरह तरह की बीमारियां और इंफेक्शन पैदा करने वाले वायरस अटैक करने लगते हैं। एचआईवी पॉजिटिव होने के करीब 8-10 साल बाद इन तमाम बीमारियों के लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं। इस स्थिति को ही एड्स कहा जाता है। वैसे, एचआईवी पॉजिटिव होने के बाद से एड्स होने तक केगैप को दवाओं की मदद से बढ़ाया जा सकता है।
ये लक्षण
अचानक वजन कम होने लगे
लगातार खांसी और सिर दर्द रहे
नाखून में बदलाव दिखे, टूटने लगें या रंग बदलने लगे
थकान हावी होने लगे
मसल्स और जोड़ों में दर्द रहे
त्वचा पर कई जगह फोड़े निकल आएं
हेपेटाइटिस-सी
एचआईवी टेस्ट
हेपेटाइटिस-सी को इसे काला पीलिया भी कहते हैं। यह एक संक्रामक रोग है, जो हेपेटाइटिस-सी वायरस एचसीवी की वजह से होता है और यकृत को प्रभावित करता है। यह वायरस रक्त से रक्त के संपर्क द्वारा फैलता है। इलाज और देखभाल से यह ठीक हो जाता है। इस बीमारी का पता शुरू में नहीं लग पाता। यह जानलेवा हो जाती है। इसके इलाज में करीब 80 हजार रुपये का खर्च आता है।
हेपेटाइटिस-बी
हेपेटाइटिस-बी एक संक्रामक बीमारी है। इसकेकारण लीवर की सूजन और जलन पैदा होती है। इसके वायरस का संचरण संक्रमित रक्त या शरीर के तरल पदार्थ केसंपर्क में जाने से होता है। इसका इलाज वायरस रोधी दवाओं से किया जाता है। ये दवाएं खून में वायरस की मात्रा घटा सकती हैं या उन्हें हटा सकती हैं। जिससे लीवर सिरसिस या लीवर कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है।
हेपेटाइटिस बी-सी लक्षण
एचआईवी रोग
जी मचलाना, उल्टियां आना, भूख कम लगना, बुखार आना, पेट के ऊपरी दाहिने भाग में दर्द होना, पीलिया ग्रस्त होना, मूत्र गाढ़ा पीले रंग का होना।
इनसे बचेंगे तो रहेंगे स्वस्थ
हेपेटाइटिस बी और संक्रमण के कारण लगभग वहीं हैं, जो एचआईवी संक्रमण केहोते हैं। इन कारणों से बचाव करने से इन बीमारियों से काफी हद तक बचा जा सकता है।
इंजेक्शन से नशीली दवाओं का प्रयोग करना एचसीवी संक्रमण का सबसे आम रास्ता है। कोई भी ऐसा कार्य या गतिविधि जिसमें खून से खून का संपर्क होने की संभावना है, संक्रमण का संभावित स्रोत हो सकता है।
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