- मदरसा जमालुद्दीन दरबार में साहित्यिक संस्था अंजुमन इर्तिका ए अदब ए उर्दू की मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
फलावदा। मदरसा जमालुद्दीन दरबार में साहित्यिक संस्था अंजुमन इर्तिका ए अदब ए उर्दू की मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन आफताब ए सुखन सैयद सालिक रिजवी की स्मृति में किया गया। अध्यक्षता मारूफ बुजुर्ग शायर जनाब अनवार उल हक शादां और संचालन मिर्जा मिनहाजुद्दीन मोनिस ने अंजाम दिए। काव्य गोष्ठी के प्रारंभ से पहले सालिक रिजवी मरहूम के बेटों मोहम्मद आरिफ रिजवी व मोहम्मद आसिफ रिजवी ने सभी कवियों को कलम-डायरी और सालिक रिजवी का मजमूआ कलाम एहसास देकर सम्मानित किया।
सालिक रिजवी की नाते पाक उनके शागिर्द महफूज उर रहमान माहिर ने पेश की। उस्ताद शायर अनवार उल हक शादां ने कहा कि कितनी अजीब बात है रूदाद ए तिश्नगी, कोई सुना रहा है समंदर के सामने। मिर्जा हसीमुद्दीन हमदम ने पढ़ा कि क्यों डूबने वाला होता है मायूस खुदा की रहमत से। मौजें हो कश्ती की निगहबां ये भी तो हो सकता है। मास्टर फैयाज अली नादिर ने कहा कि मस्जिद हो कलीसा हो शिवाला हो के मंदिर। तुम अपनी अना के लिए मिस्मार ना करना।
सैयद नायाबुद्दीन नायाब ने कहा आ गई जब याद हमको आखिरत नायाब बस। फिर खुदा के खौफ से वो गिड़गिड़ाना याद है। चांद रिजवी चांद ने कहा दो कदम साथ चलोगे तो समझ आएगा। कितना मुश्किल है मेरे कद के बराबर होना। अब्दुस समद साहिर ने कहा कि एल्बम तुम्हारी हमने भी देखी है गौर से। ताजा में हम नहीं हैं पुरानी में हम भी थे। डॉ. सलीम खान सलीम कहते हैं देख ले आके एक बार जरा, तेरी दुनिया से जा रहा हूं मैं। तस्नीम रिजवी ने पढ़ा किस्मत ये जब से रूठी है दिल बे नियाज है। रहता है जो भी मुझसे खफा रहने दीजिए।
जफर अब्बास रिजवी ने कहा जिनके दिलों में प्यार की अजमत है दोस्तों, उनसे किसी भी हाल में नफरत न कीजिए। हाफिज मोहम्मद दानिश ने पढ़ा तोड़कर खुद वफा के बंधन को। मुझ पर इल्जाम धर गया कोई। निसार अहकर फरीदी कहते हैं कि जब से बेटे की आई है छम्मो। बाप से बदजबान बोलता है। मां से बोले हैं तू तड़ाक के साथ। सास को अम्मा जान बोलता है। इनके अलावा तनसीब रिजवी आदि ने भी अपनी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस मौके पर अलहाज अतिकुर रहमान, शराफत अली, कारी मोहम्मद आरिफ, मोहम्मद यासीन कुरैशी, हाफिज अय्यूब कुरैशी, सफवान रिजवी, नायाब अंसारी, हाफिज मुजम्मिल अंसारी, मिर्जा समीउद्दीन, मिर्जा सलीमुद्दीन, मिर्जा तनवीर, अकील मिर्जा, फुरकान रिजवी आदि मौजूद रहे। साहित्यिक संस्था के अध्यक्ष मास्टर फैयाज अली नादिर ने श्रोताओं का धन्यवाद किया।