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Meerut News: सुप्रीम कोर्ट का डंडा चला तो याद आए नियम कायदे

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सेंट्रल मार्केट में तैनात पुलिस और पीएसी - फोटो : Archive
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आवास एवं विकास परिषद की विभिन्न योजनाओं में नियमों को ताक पर रखकर आवासीय भवनों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर आखिरकार सुप्रीम कोर्ट का डंडा चला तो विभागों को नियम कायदे याद आ गए। पिछले करीब 35-40 साल से क्षेत्र में आवासीय भवनों में शोरूम, दुकान, अस्पताल, बैंक, स्कूल आदि का संचालन हो रहा है। लोगों का कहना है कि विभागों की ओर से इन पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। महज नोटिस भेज कर ही अधिकारियों ने इतिश्री कर ली। मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग ने छह अस्पतालों के लाइसेंस निरस्त कर दिए।
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शास्त्री नगर सेंट्रल मार्केट के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आवासीय भवन में चल रही पूर्णतया व्यावसायिक गतिविधियों पर 44 भवनों को सील करने के आदेश सोमवार को दिए। इसके बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने चिकित्सकों संग शास्त्री नगर में बैठक कर मरीजों को स्थानांतरित करने के निर्देश दिए थे। मंगलवार को भी अस्पताल से मरीजों को शिफ्ट किया गया। वहीं शाम को सीएमओ ने सभी छह अस्पताल के लाइसेंस निरस्त कर दिए।
वहीं क्षेत्र में दिनभर चर्चा रही कि 30- 40 सालों से क्षेत्र में अस्पताल चल रहे हैं। इससे पहले दिन पर कोई भी नोटिस तक की कार्रवाई नहीं की गई। ये हाल तब है जबकि पिछले डेढ़ दशक से भी अधिक समय से कई स्कूल क्षेत्र में संचालित हैं और राष्ट्रीयकृत बैंक भी चल रहे हैं। इस पर भी सुप्रीम कोर्ट की ओर से कड़ी आपत्ति दर्ज की गई। पूछा गया कि आखिर बिना कंप्लीशन सर्टिफिकेट लिए बैंक कैसे शुरू हो गए। लोगों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के डंडे के बाद ही विभागों की ओर से एकाएक कैसे सक्रियता बरती जा रही है।
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एक तरह से व्यापारियों को राहत
सुप्रीम कोर्ट ने 661/ 6 के मामले में सुनवाई करते हुए आवासीय भवनों में चल रही व्यावसायिक गतिविधि पर नाराजगी जताते हुए 17 दिसंबर 2024 को ध्वस्तीकरण के आदेश दिए थे। आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना की ओर से अब मानना याचिका दाखिल करने के बाद 25 और 26 अक्तूबर 2025 को 661/ 6 का ध्वस्तीकरण हुआ। वहीं अब 44 भवन को ही सील करने के आदेश सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिए हैं। ऐसे में कई व्यापारियों का कहना है कि आवास एवं विकास परिषद के सर्वे में 1468 ऐसी आवासीय संपत्तियों हैं जिनमें व्यावसायिक गतिविधियां हो रही हैं, इन्हें ध्वस्त करने के 26 जनवरी को आदेश दिए गए थे। सोमवार के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को कई व्यापारी राहत भी मान रहे हैं।
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