प्रदेश को गन्ना उत्पादन में नंबर वन बनाने में अहम भूमिका अदा करने वाला मेरठ गेहूं उत्पादन में लगातार पिछड़ता जा रहा है। जिले का किसान जरूरत भर का भी गेहूं पैदा नहीं कर पा रहा है। गन्ने का रकबा बढ़ने से गेहूं का रकबा लगातार कम होता जा रहा है। इस साल भी गेहूं के रकबे में भारी गिरावट की संभावना है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार आबादी के सापेक्ष प्रति व्यक्ति 77 किलोग्राम गेहूं ही हिस्से में आ रहा है। जिले का किसान जरूरत भर का भी गेहूं पैदा नहीं कर पा रहा है।
मजबूत फसल, अच्छा रेट भा रहा
मजबूत फसल और रेट बेहतर होने के चलते यहां के किसानों को गन्ना खूब भा रहा है। आंकड़ों पर नजर डाले तो वर्ष 2017-18 में मेरठ का गन्ना रकबा 120624 हेक्टेयर था वहीं 2018-19 में यह 7 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 129379 हेक्टेयर हो गया। गेहूं का रकबा जहां वर्ष 2016-17 में 76 हजार हेक्टेयर था वहीं 2017-18 में घटकर 75 हजार हेक्टेयर रह गया था।
इस साल इसमें भारी गिरावट के साथ 70 हजार हेक्टेयर तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। 44 कुंतल प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन के हिसाब से करीब 30 लाख 80 हजार कुंतल गेहूं पैदा होगा। जिले की आबादी करीब 40 लाख है। इस हिसाब से प्रति व्यक्ति के हिस्से में करीब 77 किलो ही गेहूं आ पाएगा।