हाईवे पर होती हैं सबसे ज्यादा मौतें
एन एच 58 में होते हैं सबसे ज्यादा सड़क हादसे होते हैं।
केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान ने कई हाईवे पर प्लान तैयार किया है।
दिल्ली मेरठ हाईवे, मेरठ बुलंदशहर हाईवे के बाद गढ़ रोड का चौड़ीकरण होना है।
एक्सपर्ट के अनुसार सड़क के निर्माण कार्य के समय ही ब्लैक स्पॉट पर नजर रखी जाती है।
हाईवे पर जब 500 मीटर के दायरे में दुघर्टनाएं हों तो ब्लैक स्पॉट चिन्हित कर दिया जाता है।
हाईवे और मुख्य मार्गों पर एक साल में 75 से 80 प्रतिशत मौत होती हैं
यहां हैं ब्लैक स्पॉट
पुलिस के आंकड़ों में 25 ब्लैक स्पॉट हैं। एनएच-58 (दिल्ली देहरादून हाईवे), दिल्ली पौड़ी मार्ग, मेरठ- बुलंदशहर हाईवे और गढ़ रोड पर ब्लैक स्पॉट चिन्हित हैं। मेरठ पौड़ी मार्ग पर डेयरी फार्म तिराहा, फिटकरी पुलिया, मवाना तिराहा और बहसूमा बाईपास मोड़ हैं। यह वह ब्लैक स्पॉट हैं जहां प्रत्येक साल सड़क दुघर्टनाओं में जान जाती है। यहां न तो साइन बोर्ड लगे हुए हैं। न ही स्पीड कम के लिए ब्रेकर हैं। इंजीनियरिंग के लिए भी इन पर कोई काम नहीं किया गया। हापुड़ रोड पर बिजली बंबा पुलिस चौकी, फफूंडा पुलिस और कैली कट पर सबसे ज्यादा हादसे होते हैं। गढ़ रोड व एनएच- 58 पर भी कई जगह हैं। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार 2017 में 1040 सड़क दुघर्टनाएं हुईं, जिनमें 417 लोगों की मौत और 808 घायल हुए।
2017 में एनएच 58 की स्थिति
हादसों की संख्या 398
घायलों की संख्या 322
मृतकों की संख्या 172
2017 में स्टेट हाईवे की स्थिति
हादसों की संख्या 447
घायलों की संख्या 363
मृतकों की संख्या 200
यह कहते हैं एक्सपर्ट
केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान के निदेशक प्रो. सतीश चंद्र का कहना है कि सड़क बनाते समय ही ब्लैक स्पॉट पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाता है। एक बार रोड बनने के बाद फिर सुधार नहीं आता, इंजीनियरिंग से ब्लैक स्पॉट को खत्म करने पर काम किया जाता है। कई हाइवों पर सीआरआरआई की मदद ली गई है।
विभागों की भी है जिम्मेदारी
मेरठ रेंज के आईजी रामकुमार का कहना है कि हाइवे जहां भी ब्लैक स्पॉट चिन्हित हैं। उनमें संबंधित विभागों की भी जिम्मेदारी है। ट्रैफिक पुलिस यातायात व्यवस्था के लिए काम करती है। ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर पुलिस कार्रवाई करती है।
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