हस्तिनापुर। चार महीने से किसानों द्वारा अपने खेतों को खून पसीने से सींच कर तैयार की गई गेहूं की फसल को पिछले तीन दिनों तक हुई बरसात ने बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। क्षेत्र में ऐसे कई खेत आपको नजर आएंगे, जहां पर गेहूं की फसल जमीन पर फैल गई है।
अक्तूबर-नवंबर माह में किसानों ने गेहूं की फसल की बुवाई करते हुए अनेक सपने देखे थे। अब उनकी फसल तैयारी की ओर थी। उम्मीद थी कि अगले एक महीने में फसल पककर तैयार होगी और बंपर पैदावार निकलेगी। इससे वह अपने बच्चों की पढ़ाई और विवाह संबंधित कार्यों को आसानी से निपटा लेंगे, परंतु तीन दिन पूर्व अचानक मौसम में हुए बदलाव के कारण बारिश और तेज हवाओं का सिलसिला शुरू हो गया। इसने किसानों की गेहूं की फसल को बर्बाद करने में कोई कमी नहीं छोड़ी है।
तीन दिनों से लगातार मौसम में उतार-चढ़ाव का क्रम बना हुआ था। शनिवार को दिन में धूप निकलने के बाद गर्मी बढ़ी, लेकिन शाम होते-होते मौसम ने फिर पलटी मार दी और हवा के साथ बारिश शुरू हो गई। इससे गेहूं के अलावा सरसों की फसल व सब्जियों में भी नुकसान हुआ है।
किसान सुंदर सिंह विर्क, जज सिंह, हरविंदर सिंह, गुरप्रीत सिंह का कहना है कि इस समय गेहूं की अगेती फसल में दाना बन रहा है। इससे पौधे का वजन बढ़ रहा है। ऐसे में बारिश के कारण जमीन पर बिछी गेहूं की फसल उठने की संभावना कम है, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि तेज हवाओं का गेहूं से ज्यादा नुकसान सरसों की फसल में है। सरसों की फसल भी पकने के नजदीक है। तेज हवा के कारण सरसों की फसल भी जमीन पर गिर गई है।
उत्पादन क्षमता पर पड़ेगा असर
मौसम के मिजाज को देखते हुए किसानों को सलाह दी गई कि वह पांच मार्च तक अपनी फसलों की सिंचाई न करें और न ही किसी प्रकार का स्प्रे करें। इस दौरान हवा की गति तेज रहने का अनुमान है। सरसों की अगेती किस्म में दाना पड़ना शुरू हो गया है। तेज हवा चलने से सरसों को नुकसान हो सकता है। गेहूं की फसल को पकने में करीब एक माह और लगेगा। जो फैसलें जमीन पर गिर गई हैं, उनकी उत्पादन क्षमता पर सीधा असर पड़ेगा। -डॉ. नवीन चंद्र, कृषि वैज्ञानिक, स्वामी कल्याण देव कृषि विज्ञान केंद्र