धान और गन्ने की फसल पर सबसे ज्यादा खतरा
मौसम में बदलाव का असर खेतों में खड़ी फसलों पर पड़ सकता है। खासकर जिन खेतों में धान की फसल पकने के करीब है, वहां तेज हवाओं के कारण पौधे गिरने का खतरा है। फसल गिरने से कटाई में परेशानी हो सकती है। लगातार बारिश होने और खेतों में पानी भरने की स्थिति में दाने की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है।
कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही के अनुसार, तेज आंधी से धान की पकी हुई फसल खेतों में गिर सकती है। इससे कटाई में अतिरिक्त मेहनत लगती है और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका रहती है।
गन्ने की लंबी फसल भी तेज हवाओं की चपेट में आ सकती है। फसल गिरने से कटाई और ढुलाई में परेशानी बढ़ सकती है। किसानों को अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक नुकसान का आकलन बारिश की मात्रा, हवा की गति और खेतों की स्थिति के आधार पर ही किया जा सकेगा।
सहारनपुर में भी बारिश से जनजीवन प्रभावित
सहारनपुर में भी सुबह से तेज बारिश और हवाओं के चलते मौसम बदल गया। सुबह काम पर जाने वाले लोगों को आवागमन में परेशानी हुई। बारिश के बीच अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
अचानक मौसम खराब होने से घरों से निकले लोगों की दिनचर्या प्रभावित हुई। बारिश और तेज हवा के कारण सड़कों पर आवाजाही मुश्किल हुई। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में मौसम के प्रभाव की स्थिति स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग रही।
किसानों को सतर्क रहने की जरूरत
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के बाद खेतों में जलभराव की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। जिन खेतों में पानी जमा हो रहा है, वहां फसल और मिट्टी की स्थिति के अनुसार जल निकासी की व्यवस्था करनी चाहिए। कटाई के लिए तैयार फसलों की नियमित निगरानी करें और कटी हुई उपज को खुले में छोड़ने के बजाय सुरक्षित स्थान पर रखें।
बारिश के तुरंत बाद खेतों में अनावश्यक सिंचाई करने से बचना चाहिए। कृषि कार्य मौसम और खेतों की नमी की स्थिति देखकर ही करने चाहिए। किसानों को मौसम संबंधी आधिकारिक सलाह पर नजर रखने की भी जरूरत है।