मेरठ। मेरठ कैंट क्षेत्र के रविंद्रपुरी इलाके में उल्टी-दस्त के मरीज मिलने के मामले में दूसरे दिन शनिवार को भी स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच शिविर लगाया। साथ ही अधिकारियों ने क्षेत्र का भ्रमण किया। स्वास्थ्य अधिकारियों ने पाया कि कई स्थानों पर पानी की पाइपलाइन नालियों में डूबी हुई हैं। इससे दूषित जल आपूर्ति की आशंका बनी हुई है।
अधिकारियों का कहना है कि पाइपलाइन की मरम्मत और सफाई व्यवस्था सुधारने की आवश्यकता है। इस संबंध में सीएमओ डॉ. अशोक कटारिया ने कैंटोनमेंट बोर्ड के अधिशासी अधिकारी को पत्र भी लिखा है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक कटारिया ने बताया कि उन्होंने मंडलीय सर्विलांस अधिकारी डॉ. अशोक तालियान, जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. सुधीर कुमार और पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. रक्षित के साथ क्षेत्र का भ्रमण किया। नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कैंट की प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. अंकिता भारद्वाज के नेतृत्व में टीम ने हाउस टू हाउस सर्वे के साथ स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया। शिविर में 30 मरीजों को उपचार और परामर्श दिया गया। राहत की बात यह रही कि किसी नए उल्टी-दस्त के मरीज की पुष्टि नहीं हुई। चार संदिग्ध बुखार रोगियों की रैपिड डायग्नोस्टिक किट से जांच की गई।
इनमें से दो के रक्त नमूने टाइफाइड की पुष्टि के लिए मेडिकल कॉलेज मेरठ की माइक्रोबायोलॉजी लैब में भेजे गए हैं।आशा कार्यकर्ताओं ने 50 घरों का सर्वे किया लेकिन वहां भी कोई नया केस नहीं मिला। टीम ने क्षेत्र में क्लोरीन की गोलियां वितरित कीं और लोगों को पानी उबालकर पीने और साफ-सफाई बनाए रखने के लिए जागरूक किया। उन्होंने बताया कि कई स्थानों पर पानी की पाइपलाइन नालियों में डूबी हुई मिली जिससे दूषित जल आपूर्ति की आशंका बनी हुई है। पाइपलाइन की मरम्मत के लिए कैंटोनमेंट बोर्ड के अधिशासी अधिकारी को पत्र लिखा है।