मलियाना राजवाहा से निकला था माइनर
एमआईईटी कालेज के निकट बाईपास से होते हुए राजवाहा निकल रहा है। जो संजय वन के बराबर से बिजली बंबा बाईपास से गुजर रहा है। कागजों में इसकी चौड़ाई 22 से 27 मीटर है। मलियाना में इसी रजवाहा से नूरनगर के लिए लगभग 12 फीट चौड़ा माइनर निकाला गया था।
इसकी लंबाई लगभग साढ़े चार किमी थी। जिससे मलियाना, मोहकमपुर, हाफिजाबाद मेवला, सरस्वती लोक मार्ग से नूरनगर तक खेतों की सिंचाई होती थी। जानकार बताते हैं कि फतेहउल्लापुर तालाब तक माइनर का पानी पहुंचता था।
यह माइनर फसलों के लिए वरदान साबित होता था। लेकिन अब यह माइनर कहां है, उस पर किसने कब्जा कर लिया, अरबों रुपये की जमीन को कौन बेचकर खा गया, जैसे ज्वलंत सवालों के जवाब सिंचाई विभाग के पास नहीं हैं।
सरकारी प्रक्रिया भी दरकिनार
माइनर की भूमि पर कब्जा करने वाले किसी सरकारी अथवा प्राइवेट व्यक्ति ने सिंचाई विभाग से न तो हस्तांतरित करने के लिए कोई पत्र व्यवहार किया और न ही विभाग के खजाने में भूमि की कीमत जमा की। इतना ही नहीं सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने भी अरबों रुपये की बेशकीमती जमीन को मिलीभगत करके लुटने दिया।
अलमारियों में कैद हैं रजवाहा और माइनरों की फाइलें
शहर का विस्तार होता गया। खेत कंकरीट के जंगलों में तब्दील होते गए। इस प्रक्रिया में सिंचाई विभाग के रजवाहे और माइनर भी लुप्त होते गए। सभी की फाइलें विभाग की अलमारी में कैद कर दी गयी।
यही नहीं, जानकारी मिल रही हैं कि सिंचाई विभाग की जमीन पर अवैध कब्जे कराने वालों में शामिल रहने वाले विभाग के अधिकारियों ने रिकॉर्ड में भी फेरबदल किया है। बताया जा रहा है कि अगर विभाग ने गंभीरता से जांच की तो जहां तत्कालीन अधिकारियों पर भी गाज गिरेगी, वहीं अवैध कब्जा कर किए गए निर्माणों पर भी बुलडोजर चलेगा।