मेरठ। काली नदी के निकट स्थित गांवड़ी डंपिंग ग्राउंड के कूड़ा निस्तारण को लेेकर एनजीटी सख्त रुख अख्तियार किए हुए हैं। उसने हाल ही में सुनवाई करते हुए नगर निगम को मार्च तक कूड़े का निस्तारण करने का आदेश दिया है। यहां लगे 150 मीट्रिक टन क्षमता के बैलेस्टिक सैपरेटर प्लांट से आदेश का पालन करना दूर की कौड़ी है। इसकी क्षमता नहीं बढ़ने तक या दूसरा प्लांट नहीं लगने तक कूड़े से निजात नहीं मिल सकती है।
एनजीटी के आदेश पर नगर निगम ने गांवड़ी डंपिंग ग्राउंड पर कचरे के निस्तारण के लिए बैलेस्टिक सैपरेटर प्लांट लगाया है। इसकी क्षमता 150 मीट्रिक टन रोजाना है। यहां करीब 30 हजार मीट्रिक टन कूड़ा जमा है। एनजीटी की ओवरसाइट कमेटी इसकी निगरानी कर रही है। इसने पिछले दिनों डंपिंग ग्राउंड के कूड़े का वर्चुअल मुआयना किया था। इसकी रिपोर्ट के बाद एनजीटी ने मार्च 2021 तक कूड़े का निपटान करने का आदेश दिया। यहां मौजूद मशीन की क्षमता पर नजर डालें तो यह समय सीमा यानि 110 दिन तक पूरी क्षमता से काम करे तो भी 16500 मीट्रिक टन कूड़े का ही निस्तारण कर पाएगी। इसके चलते निगम अधिकारियों की चिंता है कि प्लांट की क्षमता बढ़ाए बगैर या दूसरा प्लांट स्थापित किए बिना एनजीटी का पालन असंभव है।
चारों तरफ बन गए कूड़े के पहाड़
नगर निगम की लापरवाही के चलते शहर के चारों तरफ कूड़े के पहाड़ बन गए हैं। मंगतपुरम, लोहियानगर, मार्शल पिच, नंगलाताशी आदि में छोटे-बड़े कूड़े के पहाड़ खड़े हो गए हैं। इसके बाद भी नगर निगम कूड़ा निस्तारण नहीं कर पा रहा है। लोहियानगर में भी प्रस्तावित प्लांट नहीं लगाया जा सका है।
डीपीआर बनाने के निर्देश
नगर आयुक्त मनीष बंसल ने शहर से रोजाना निकलने वाले 900 मीट्रिक टन कूड़े के निस्तारण के लिए डीपीआर बनाने के निर्देश दिए हैं। लोहियानगर के अतिरिक्त गांवड़ी में अतिरिक्त प्लांट लगाकर कचरे को खत्म किया जाएगा।