- वसी की हत्या में वांछित दो आरोपी और गए जेल
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संवाद न्यूज एजेंसी
दौराला। लोईया गांव में पुराने विवाद में हुई फायरिंग की घटना ने अब और गंभीर रूप ले लिया है। गोली लगने से घायल वसी अहमद की सोमवार को उपचार के दौरान मेरठ स्थित निजी अस्पताल में मौत हो गई। युवक की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में मातम पसर गया। गांव में तनाव और बढ़ गया।
शनिवार को घर के बाहर बैठे वसी अहमद को गांव के ही शामिक, आमिर ने अपने परिजनों के साथ मिलकर गोली मार दी थी। वसी के पेट और कूल्हे में गोली लगी थी। उसे मोदीपुरम अस्पताल ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर मेरठ रेफर कर दिया था। सोमवार को उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद से ही गांव में दोनों पक्षों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। एहतियात के तौर पर पुलिस बल तैनात किया गया है। मृतक के परिजनों ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। दोनों पक्षों के बीच क्रिकेट खेलने को लेकर काफी समय से विवाद चला आ रहा था।
सीओ दौराला प्रकाश चंद्र अग्रवाल ने बताया कि दौराला थाने पर वसी के भाई शमी की तहरीर पर आमिर, शामिक, शजर, मईन, अदनान के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। रविवार को आमिर पुलिस मुठभेड़ में पकड़ा गया और सोमवार को पुलिस ने शामिक और मईन को भी गिरफ्तार कर लिया। दोनों के खिलाफ पहले भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस ने दोनों को न्यायालय के समक्ष पेश कर जेल भेज दिया। अन्य की तलाश जारी है।
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ईद पर आया था घर, विवाद में गई जान
परिजनों के मुताबिक वसी मेरठ में कपड़े बेचने का काम करता था। साथ ही खेती भी करता था। कुछ माह पहले वह असम में रहकर कपड़े का कार्य करने लगा था। ईद के पर्व पर वह घर लौटा था और जल्द फिर असम जाने की तैयारी में था। यहां आने के बाद वह शामिक के परिवार से हुए विवाद में वह घिरकर रह गया। विवाद बढ़ता चला गया और खूनी संघर्ष में बदल गया। वसी तीन भाइयों में सबसे बड़ा था। वसी के दो बेटे अरहम (10), अहमद (14), दो बेटी इला (20), फबीहा (17) है। वसी के पिता शमीम इंतकाल हो चुका है। वह गांव के प्रधान रहे थे।
क्रिकेट विवाद से शुरू हुआ झगड़ा, खूनी अंजाम तक पहुंचा
संवाद न्यूज एजेंसी
दौराला। गांव लोईया में शामिक और वसी के परिवार में चली आ रही रंजिश ने आखिरकार वसी की जान ले ली। शनिवार को हुई फायरिंग में घायल वसी की सोमवार को मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि पहले से चल रहे विवाद और दर्ज प्राथमिकी के बावजूद मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। एक माह पहले विवाद हुआ था, जो धीरे-धीरे खूनी रंजिश में बदला। उस समय भी दोनों पक्षों में फायरिंग हुई थी। इस मामले में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ दौराला थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। यदि पुलिस उस समय ही मामले को गंभीरता से लेकर प्रभावी कार्रवाई करती तो शनिवार की घटना टाली जा सकती थी। पुलिस ने इसे सामान्य विवाद मानकर नजरअंदाज कर दिया, जिसका नतीजा अब एक युवक की मौत के रूप में सामने आया है।
मुठभेड़ में गिरपतार आमिर पर पहले से विभिन्न थानों में करीब एक दर्जन मुकदमे दर्ज हैं। उस पर गोकशी, गैंगस्टर एक्ट और गुंडा एक्ट जैसे गंभीर आरोप हैं। आमिर वर्तमान में देहरादून में रह रहा था और शनिवार को किसी मामले में तारीख पर आया था। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच फिर विवाद हुआ। इसके बाद फायरिंग की घटना हो गई। एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले का कहना है कि जांच के दौरान दोनों पक्षों में काफी दिनों से रंजिश का मामला सामने आया है।
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वसी को जान नहीं गंवानी पड़ती...
कुछ माह पहले क्रिकेट खेलने को लेकर वसी के बेटे और शामिक के भतीजे के बीच विवाद हुआ था, जो दोनों के परिवार में रंजिश का कारण बना। 26 मार्च की रात वसी के ही परिवार के मोबिन ने शामिक पक्ष पर फायरिंग, मारपीट का आरोप लगाया था। मोबिन की तहरीर पर पुलिस ने आमिर, शामिक, गुलजार, शजर, शान मोहम्मद, जावेद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद 28 मार्च को शामिक ने शवाब रिजवी, साहिल, सारिब, सजाहत के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इस घटना के बाद भी पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। पुलिस यदि पहले से ही दोनों पक्षों को बुलाकर वार्ता करती या ठोस कार्रवाई करती तो वसी को जान नहीं गंवानी पड़ती।
दौराला - जेल भेजे गए शामिक और मईन। स्रोत : पुलिस