विधानसभा के पहले चरण के मतदान में मतदाताओं ने वोटिंग तो खूब की, लेकिन खामोशी की चादर इस कदर तानी कि उम्मीदवार भी चकराए नजर आ रहे हैं। खासतौर पर मुस्लिम और दलितों ने सबकी हां में हां मिलाई पर ईवीएम का बटन खामोशी से मनपसंद प्रत्याशी पर ही दबाया। मतदाताओं का यह ‘साइलेंट ऑपरेशन’ कई दिग्गजों के समीकरण इस बार ध्वस्त कर देगा तो कई प्रत्याशियों के सिर जीत का सेहरा बांधेगा।
पहले चरण में शनिवार को मेरठ समेत मुजफ्फरनगर, शामली और बागपत की 19 सीटों के लिए वोट डाले गए। लगभग सभी सीटों पर मुकाबला आमने-सामने का है। हालांकि, कुछ सीटें त्रिकोणीय मुकाबले में भी फंसी हैं। लेकिन, ज्यादातर पर यह साफ हो रहा है कि इस चुनावी रण में किस-किस के बीच लड़ाई है। इस चुनाव में जिस तरह से उम्मीदवारों ने अपनी तैयारी की थी, उससे भी आगे जाकर मतदाताओं ने अपना दिमाग चलाया। ज्यादातर प्रत्याशियों की हां में हां मिलाई। वोट का आश्वासन सबको दिया, लेकिन की अपने मन की। खामोशी से डाला गया यह वोट कई सीटों के समीकरण को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है।
दलित और मुस्लिमों ने घुमाया
खासतौर पर दलित और मुस्लिम मतदाताओं ने इस बार प्लानिंग से काम किया। लगभग 12 बजे दक्षिण विधानसभा सीट के लिसाड़ी स्थित एक बूथ पर टीम पहुंची तो यहां दलित मतदाताओं को लगा कि राजनीतिक दल के लोग आए हैं। बोेले कि यहां तो सभी दलों को वोट कर रहे हैं। बाद में बताया कि मीडिया की टीम है तो फिर धीरे से बोले, भाई बसपा को वोट किया जा रहा है। आगे मुस्लिम बहुल बूथ पर पहले कहा कि हाथी को वोट दे रहे हैं पर फिर धीरे से अपनी बात बताई। कहा कि कांग्रेस को भी वोट कर रहे हैं। हालांकि, आगे जुर्रानपुर गांव में मतदाता एकतरफा नजर आए। घोसीपुर में डबल मर्डर के बाद तनाव की स्थिति थी। गांव शोक मग्न था। बावजूद इसके ग्रामीणों ने आपसी बातचीत में कहा कि मतदान शुरू किया जाए। यहां मतदान चल रहा था और मुस्लिम बंटे नजर आए।
बताया कहीं, बटन दबाई कहीं और
लगभग 12 बजे फफूंडा गांव में सभी दलों को वोट मिल रहे थे। यहां हाथी पर खासा रुझान था तो मुस्लिम हाथी की बात कहकर सपा पर वोट कर रहे थे। बाकी भाजपा की भी यहां खूब लहर थी। किठौर विधानसभा क्षेत्र के गांव लालपुर में वोट बंट रहा था। यहां गुर्जर वोट भी बंटे नजर आए। हालांकि, गजराज नागर के गुर्जर होने के कारण यहां गुर्जरों पर खासी ताकत लगी थी। लेकिन, शाहिद मंजूर के कई सिपहसालारों के कारण यहां गुर्जर मत उनकी तरफ भी जाता नजर आया।
दक्षिण सीट पर ध्रुवीकरण का असर
इससे पहले दक्षिण सीट पर कई जगह जमकर ध्रुवीकरण हुआ। मतदाता कहीं भाजपा तो कहीं बसपा के पक्ष में लामबंद दिखे। काजीपुर, घोसीपुर, जाहिदपुर, हाजीपुर आदि में भाजपा, बसपा की तगड़ी टक्कर दिखी। इन गांवों में कांग्रेस ने भी खूब मत लिए तो कहीं-कहीं रालोद भी मजबूत नजर आया। गगोल, गूमी आदि गांवों में गुर्जरों में बंटवारा दिखा।
आखिर किसका समीकरण बिगड़ेगा
दक्षिण सीट पर सीधा मुकाबला भाजपा के सोमेंद्र तोमर और बसपा के हाजी याकूब कुरैशी के बीच नजर आया। दोनों के अपने-अपने दावे रहे। हालांकि, मुस्लिम बहुल इलाकों में जाकिर कॉलोनी, ढबाई नगर, जैदी फार्म, श्याम नगर जैदी फार्म आदि में बसपा को जमकर वोट पड़े। यहां कांग्रेस ने भी मुस्लिमों के वोट बांटे। उधर, शास्त्रीनगर में भाजपा को जमकर वोट हुए। रालोद ने भी कई जगह अपनी तगड़ी उपस्थिति दर्ज कराई। अहम बात यह है कि वोटों का बंटवारा कई दिग्गजों का समीकरण बना रहा है तो कई का बिगाड़ रहा है। शहर सीट पर यही बंटवारा इस बार पेच फंसा रहा है। भाजपा और सपा का यहां सीधा मुकाबला है। यहां इस बार भाजपा वोटों में सेंध लगी तो मुस्लिम में यहां ध्रुवीकरण दिखा। सरधना में भी बंटवारा फैक्टर काम कर रहा है तो कैंट में इस समय पेच फंसा है। हस्तिनापुर में भी मुकाबले आपस में उलझ गए हैं। दलित यहां बसपा के साथ अन्य पर भी गया है। सिवालखास में मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण दिखाई दिया। उधर, जाटों का सबसे ज्यादा रुझान यहां रालोद पर रहा तो अति पिछ़डों और अगड़ों को वोट भाजपा को खूब गया।