धेवते विशू के भैरवघाटी में गिरने की खबर पाते ही भाकियू नेता राकेश टिकैत विशू के पिता मुकेश, मामा हरेंद्र और नरेंद्र के साथ तुरंत उत्तरकाशी रवाना हो गए थे। घटनास्थल पर पहुंचे तो घाटी की गहराई देखकर दंग रह गए। सबने यही सोचा कि यहां से कोई जिंदा तो क्या उसका शव तक नहीं मिलेगा। आसपास के लोग भी बोले कि इस घाटी का इतिहास है कि जो इसमें जो गिरा, वह कभी मिला नहीं। पिता तो हिम्मत हार गए। लेकिन राकेश टिकैत ने ठान लिया था कि वह अपने धेवते को हर हाल में घाटी से बाहर निकलवाएंगे।
ऐसे चला घाटी में अभियान
राकेश टिकैत के अनुसार चार दिन तक सर्च अभियान के बाद सफलता न मिलने पर उन्होंने गृह मंत्री राजनाथ सिंह से संपर्क किया। जिन्होंने आईटीबीपी के आईजी दीपेश जुनेजा को ड्रोन कैमरों की मदद से सर्च अभियान चलाने के निर्देश दिए। जिसके बाद विशू घाटी में करीब 640 मीटर की गहराई में झाड़ियों में पड़ा मिला था। इस दौरान करीब 15 बार सेना ने रेस्क्यू अभियान चलाया। जिसमें दो ड्रोन कैमरे, दर्जनों ड्रिल मशीनें प्रयोग हुईं। इसके अलावा अमेरिका स्थित बोस्टन कॉलेज ऑफ माउंटेन से दो पर्वतारोही बुलाए गए। जिन्होंने रेस्क्यू अभियान को लीड किया। इस दौरान रेस्क्यू टीम ने नदी में बहते एक युवक को बाहर निकाला तो घाटी से एक कंकाल भी बरामद किया।
परिजनों ने दी युवाओं को नसीहत
विशू की मौत से परिजन टूट चुके हैं। उन्होंने कहा कि विशू झूठ बोलकर घर से गया था। जो बच्चे झूठ बोलकर जाते हैं और अपने मां-बाप का कहना नहीं मानते, वह खुद भी दु:ख उठाते हैं और परिजनों को भी दुख देते हैं। इसलिए बच्चों को परिजनों की बात हमेशा माननी चाहिए। हमने विशू को मना किया था कि बाइक से मत जाना। लेकिन वह ट्रेन से जाने की बात कहकर बाइक से चला गया था। इसके अलावा कहा था कि बस हरिद्वार ही जाना। लेकिन वह हरिद्वार से 400 किमी. दूर गंगोत्री तक पहुंच गया। उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था।