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वायरस दिखा रहा दम, एंटीबॉडी निकल रही कम

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मेरठ। एक तरफ कोरोना रफ्तार पकड़ता जा रहा है, दूसरी ओर कोरोना योद्धाओं में एंटीबॉडी कम निकल रही हैं। इससे और खतरा बढ़ने की तरफ संकेत मिल रहे हैं।
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मेडिकल कॉलेज में प्लाज्मा लेने के लिए अब तक 35 लोगों को बुलाया गया और इनकी जांच की गई। सिर्फ 8 लोग प्लाज्मा डोनेट करने के मानक पर खरे उतरे। बाकी में एंटीबॉडी बेहद कम बनी थी, जिस कारण उनसे प्लाज्मा लिया ही नहीं गया। इनमें कई ऐसे थे, जिनमें एंटीबाडी थी, मगर उनका हिमोग्लोबिन काफी कम था।
लगभग 77 फीसदी में एंटीबॉडी नहीं बनी हैं। मेडिकल चिकित्सक इसे गंभीरता से ले रहे हैं। हालांकि उनका कहना है कि अभी और पड़ताल की जरूरत है ताकि यह पता चल सके कि एंटीबॉडी कम क्यों बनी हैं। मेडिकल कॉलेज ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. मोनिका राठी ने बताया कि प्लाज्मा डोनेट करने के लिए आए कोरोना योद्धाओं में एंटीबॉडी कम निकली है, जिस कारण उनका प्लाज्मा नहीं लिया गया।
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हो सकते हैं दोबारा संक्रमित
मेडिकल में पिछले दोनों ऐसे भी मरीज भर्ती हुए जिनकी कोरोना की रिपोर्ट नेगेटिव आ गई थी और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। हालांकि बाद में वे फिर कोरोना संक्रमित हो गए थे। मेडिकल के कोविड अस्पताल के प्रभारी डॉ. धीरज बालियान ने बताया कि कोरोना से ठीक होने के बाद दो-तीन हफ्तों में कोविड इम्युनोग्लोबिन एंटीबॉडी बनने लगती है। फिर से संक्रमित होने का मतलब शरीर में सही से एंटीबॉडी नहीं बनना हो सकता है या फिर एंटीबॉडी खत्म हो गई हो।
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क्या है एंटीबाडी
एंटीबॉडी शरीर का वो तत्व है, जिसका निर्माण हमारा इम्यून सिस्टम शरीर में वायरस को बेअसर करने के लिए पैदा करता है। वायरस से पीड़ित जो लोग अब पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हैं, उनके ब्लड में जो एंटीबॉडीज बन जाती हैं उन्हें ही प्लाज्मा कहते हैं।
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