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वायरल का ब्रेन ‘अटैक’

Thu, 22 Sep 2016 01:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
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जिला अस्पताल में दवा वितरित करती सुभारती की छात्राएं - फोटो : अमर उजाला
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 डेंगू और चिकनगुनिया को फैलाने वाला एडिस एजिप्टी मच्छर और ज्यादा घातक साबित होता दिखाई दे रहा है। अब तेज बुखार, सिर दर्द और जोड़ों में दर्द से कहीं ज्यादा खतरा ब्रेन अटैक का है। जिससे पता चलता है कि डेंगू का वायरस तीसरी से चौथी स्टेज में पहुंच गया है। इसकी गिरफ्त में आने पर मरीज की जान जाने तक का खतरा रहता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में टाइप -4 का डेंगू वायरस सक्रिय होता देख चिकित्सक चिंतित हैं। दो सप्ताह में अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी है, जो ब्रेन में क्लॉट यानी अटैक होने की वजह से अस्पताल में भर्ती हुए हैं।
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डेंगू और चिकनगुनिया एडिस एजिप्टी मच्छर के काटने से होता है। इसके काटने से चार टाइप्स का वायरस सक्रिय होता है। अभी तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर उत्तर भारत में टाइप 1 से लेकर 2 तक का ही वायरस मरीजों में देखा गया था। बीते सालों के दौरान कुछ मरीजों के अंदर टाइप थ्री के वायरस का संक्रमण भी पाया गया। मेडिकल साइंस और विश्व स्वास्थ्य संगठन की नजर में टाइप 1 व 2 का वायरस जानलेवा नहीं है, जिसका हर स्तर पर इलाज संभव है। टाइप 3 के डेंगू वायरस में भी मरीज को काफी हद तक बचाया जा सकता है, लेकिन टाइप 4 वायरस बेहद जानलेवा है। यह ब्रेन से लेकर मल्टी आर्गन तक पर असर डलता है। अभी तक पश्चिमी यूपी में इस तरह का वायरस देखने को नहीं मिला। हालांकि कुछ केस ऐसे भी होते हैं, जिनमें टाइप 4 के मुकाबले टाइप 3 अधिक खतरनाक होता है।

50 से अधिक ब्रेन अटैक के मरीज
15 दिनों के दौरान शहर भर के अस्पतालों में 50 से अधिक ऐसे मरीज भर्ती हुए हैं, जिन्हें न्यूरो संबंधी समस्या होने के बाद दोबारा भर्ती कराना पड़ा है। जांच के दौरान पाया गया कि उन्हें ब्रेन अटैक हुआ है, जिसके बाद ब्रेन में क्लॉट आया। जसवंत राय सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल से लेकर आनंद अस्पताल में ऐसे मरीजों की संख्या अच्छी खासी है। इससे टाइप 4 के वायरस के सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं। सभी लक्षण टाइप 4 वाले ही हैं। शहर के जाने माने न्यूरो फिजीशियन डॉ. भूपेंद्र सिंह का कहना है कि बुखार के चलते ब्रेन पर प्रेशर पड़ रहा है। जिससे ब्रेन की बारीक नसों के लीक होने की समस्या खड़ी हो रही है। इस कारण ब्रेन में क्लॉट जम रहा है।
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चिकनगुनिया, बुखार से 7 की मौत, दहशत  
 सोफीपुर गांव में चिकनगुनिया का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। बुधवार को तीन लोगों की मौत चिकनगुनिया से हो गई। पंद्रह दिन में बुखार और चिकनगुनिया से गांव में अब तक आठ मौत होने से दहशत है। वहीं पल्हैड़ा गांव में भी बुखार से तीन लोगों की मौत हो गई।
बुधवार को गांव निवासी अनवार (45) पुत्र सलीमुद्दीन, तेजपाल (45) पुत्र रामशरण, कर्मी (60) पुत्र मनफूल दो दिनों से चिकनगुनिया से पीड़ित थे। इनका प्राइवेट चिकित्सकों के यहां उपचार चल रहा था। बुधवार को तीनों की मौत हो गई। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग गांव में शिविर तो लगा रहा है, लेकिन ग्रामीणों को सिर्फ दवाईयां देने के नाम पर खानापूर्ति कर रहा है। वहीं, गांव में उचित सफाई व्यवस्था न होने के कारण चारों तरफ गंदगी फैली हुई है। बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की तरफ से लगाए गए शिविर में सपा प्रत्याशी परविंद्र ईशु भी पहुंचे और मरीजों का हाल जाना। शिविर में करीब 218 मरीजों का चेकअप किया गया और 6 के ब्लड सैंपल लिए गए। वहीं सोफीपुर निवासी पूर्व पार्षद महेंद्र भारती भी बुखार की चपेट में आ गए हैं।  उधर, पल्हैड़ा गांव में बाला(50), सत्पाली (55), ईशुपाल (70) की बुखार से मौत हो गई।

बुखार से किशोरी की मौत
बौंद्रा (ब्यूरो)। गांव ललियाना निवासी सोफिया (15) पुत्री आले नबी कई दिन से बुखार से पीड़ित थी। उसे मेरठ के प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया। उसने बुधवार को उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। इस संबंध में पीएचसी परीक्षितगढ़ प्रभारी डा. अशोक कुमार का कहना है कि गांव में बृहस्पतिवार को टीम भेजकर मरीजों की जांच कराई जाएगी।

चिकित्सा शिविर लगाने की मांग
मेरठ। भारतीय किसान आंदोलन के अध्यक्ष कुलदीप त्यागी ने डीएम बी.चंद्रकला से शिकायत की है। उन्होंने बताया कि बुखार से आए दिन मौत हो रही हैं। उन्होंने वार्डों और गांवों में चिकित्सा शिविर लगवाने की मांग की। साथ ही जो लोग पैसों की कमी के कारण समय पर इलाज नहीं करा पा रहे हैं उन्हें आर्थिक मदद दिलाई जाए।
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